अमेठी: स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही, गलत UDID कार्ड ने छीने दिव्यांगों के हक

अमेठी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से कई दिव्यांगों के UDID कार्ड में गलत जानकारी दर्ज है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और पेंशन से वंचित रहना पड़ रहा है।

Sushant Singh28 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
अमेठी: स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही, गलत UDID कार्ड ने छीने दिव्यांगों के हक

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ दिव्यांगजनों को मिलने वाले यूनिक डिसेबिलिटी आइडेंटिटी (UDID) कार्ड्स में गलत जानकारियां दर्ज होने के कारण कई लोग सरकारी लाभों से वंचित हो गए हैं। यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि एक छोटी सी प्रशासनिक चूक दिव्यांगों के लिए बुनियादी सुविधाओं और पेंशन के रास्ते में दीवार बन गई है।

ताजा मामला पिंडोरिया गांव के निवासी रामौतार का है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि उनके दिव्यांगता रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टियां की गई हैं। इस त्रुटि की वजह से वह न तो सरकारी सहायता पा सके और न ही उन्हें जरूरी सहायक यंत्र (assistive devices) मिल सके। रामौतार का दावा है कि वह पिछले पांच वर्षों से इस गलती को सुधारने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है।

सिस्टम की खामी या लापरवाही?

जिले में यह समस्या केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कई मामलों में शारीरिक दिव्यांगता को कम दृष्टि (low-vision) के रूप में दर्ज कर दिया गया है, या फिर दिव्यांगता के प्रतिशत की गणना गलत की गई है। नियम के मुताबिक, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कम से कम 40% दिव्यांगता का होना अनिवार्य है, लेकिन गलत डेटा के कारण कई पात्र लोग इस सीमा से बाहर हो गए हैं।

इस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अंशुमन सिंह का कहना है कि डिजिटल पोर्टल सिस्टम में सर्वर की समस्याओं की वजह से इस तरह की गलतियां हुई हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अब सुधार प्रक्रिया में तेजी लाने का आश्वासन दिया है, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि इस देरी की वजह से वे सालों से पेंशन और यात्रा रियायतों जैसे महत्वपूर्ण लाभों से वंचित रहे हैं।

UDID कार्ड का उद्देश्य दिव्यांगों के लिए एक एकल और सरल पहचान दस्तावेज प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान में प्रभावित लोगों को एक जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। उन्हें पुराने कार्ड सरेंडर करने होते हैं और फिर से CMO की मंजूरी लेनी पड़ती है ताकि उनके वास्तविक स्वास्थ्य विवरण को रिकॉर्ड में अपडेट किया जा सके।

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