यूपी पंचायत चुनाव: प्रशासकों की नियुक्ति पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर जारी कानूनी लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। यूपी पंचायत चुनाव याचिका पर आज, 14 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। इस मामले में मुख्य विवाद ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति और त्रि-स्तरीय चुनाव प्रक्रिया में हो रही लगातार देरी को लेकर है।
कोर्ट की इस कार्यवाही में उत्तर प्रदेश सरकार के वकील अपनी दलीलें पेश करेंगे। यह पूरा कानूनी विवाद संविधान के अनुच्छेद 243E के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जो पंचायतों के कार्यकाल को उनके निर्धारित पांच साल की अवधि से आगे बढ़ाने की वैधता की जांच करता है। कोर्ट ने पहले भी इस बात पर सवाल उठाए हैं कि क्या पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करना संवैधानिक रूप से सही है।
चुनाव में देरी और ओबीसी कमीशन की भूमिका
इस मामले में इम्तियाज हुसैन, दशरथ यादव, अरबिंद राठौर, ओम प्रकाश प्रजापति, युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडे जैसे याचिकाकर्ताओं ने वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती दी है। इससे पहले 7, 9 और 12 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान, अदालत ने राज्य चुनाव आयोग से चुनावों के लिए एक विस्तृत और समयबद्ध शेड्यूल मांगा था।
चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मतदाता सूचियां 10 जून 2026 को ही फाइनल कर ली गई थीं, लेकिन राज्य सरकार के साथ कुछ लॉजिस्टिक बाधाओं के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। इसके अलावा, कोर्ट ने समर्पित ओबीसी आयोग से भी डेटा संग्रह और आरक्षण कोटा तय करने के तरीकों पर स्पष्टीकरण मांगा है, खासकर आगरा जैसे जिलों में अपनाई गई प्रक्रियाओं को लेकर। आज की सुनवाई में इन रिपोर्टों और प्रशासकों पर सरकार की निर्भरता के कारणों पर मुख्य फोकस रहेगा।