नोएडा पुलिस की मनमानी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, कहा- खुद को कानून से ऊपर समझना बंद करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए एक बेहद सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसा लगता है जैसे पुलिस बल खुद को कानून से ऊपर मानता है और मनमाने ढंग से किसी को भी हिरासत में लेना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझ बैठा है। यह मामला दीपक नाम के एक युवक की अवैध हिरासत से जुड़ा है, जिसे एफआईआर दर्ज होने से पहले ही पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया था।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस ने हिरासत के उन बुनियादी नियमों की धज्जियां उड़ाई हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत नागरिकों को दिए गए हैं। कोर्ट ने पुलिस के दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी पकड़ी और पाया कि अधिकारियों ने हिरासत और एफआईआर की तारीखों के साथ छेड़छाड़ की थी।
पुलिस अधिकारियों को मिली फटकार और सेवा रिकॉर्ड में दर्ज होगी प्रविष्टि
सुनवाई के दौरान कोर्ट का गुस्सा इस कदर बढ़ा कि उन्होंने गौतम बुद्ध नगर कमिश्नरेट के एसीपी और एसएचओ को मौखिक रूप से फटकार लगाते हुए कहा, "आपको शर्म आनी चाहिए!" अदालत ने चिंता जताई कि राज्य की पुलिस वर्तमान में एक खराब स्थिति में है, जहां अधिकारियों को लगता है कि वे अवैध कार्यों के बाद भी सजा से बच निकलेंगे।
कोर्ट ने इस मामले में निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं:
- याचिकाकर्ता दीपक को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
- एसीपी कमलेश कांत और जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर अनुज कुमार के सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) दर्ज करने का निर्देश दिया।
- डीजीपी को आदेश दिया कि पुलिसकर्मियों के लिए विशेष ट्रेनिंग मॉड्यूल लागू किए जाएं, ताकि उन्हें नागरिक स्वतंत्रता और गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रियाओं की सही जानकारी हो।
हाईकोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि अब से किसी भी अधिकारी द्वारा यह बहाना नहीं चलेगा कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 24 घंटे से अधिक समय तक किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।