इलाहाबाद हाईकोर्ट में नारेबाजी और हंगामा, CCTV से होगी वकीलों की पहचान, कोर्ट सख्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोर्ट परिसर में नारेबाजी और हंगामा करने वाले वकीलों की CCTV से पहचान कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य में बाधा डालने और कोर्ट परिसर के भीतर नारेबाजी करने का मामला बेहद गंभीर हो गया है। कोर्ट ने इस व्यवहार को अवमानना मानते हुए सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने अब स्पष्ट कर दिया है कि जो भी वकील इस हंगामे में शामिल थे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और उनकी पहचान कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, यह पूरा विवाद मंगलवार को कोर्ट नंबर 49 में शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि एक वकील को कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि उन्हें जेल भेजा जा सकता है और उनसे एसपी (SP) से माफी मांगने को कहा गया था। इस घटना के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कोर्ट नंबर 49 के बहिष्कार की मांग की थी। इसी बात को लेकर बुधवार को कुछ वकीलों ने कोर्ट परिसर में जमकर नारेबाजी की और न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान डाला।
रजिस्ट्रार को CCTV फुटेज खंगालने का आदेश
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच ने देवेंद्र कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान इस घटना का संज्ञान लिया। कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर बाधा माना है। अदालत ने रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) को तुरंत निर्देश दिए हैं कि वे कोर्ट रूम के बाहर लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच करें और हंगामा करने वाले वकीलों की पहचान करें।
कोर्ट ने आदेश दिया है कि पहचान के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाए। इसके बाद मामले को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के पास भेजा जाएगा ताकि दोषी वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। साथ ही, कोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि संबंधित वकीलों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही (Contempt Proceedings) शुरू की जा सकती है।