इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 3 महीने के भीतर कराए जाएं यूपी पंचायत चुनाव

Shubham Singh14 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को सख्त निर्देश दिए हैं कि आगामी यूपी पंचायत चुनाव आदेश के तहत अगले तीन महीनों के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

यह आदेश जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने इम्तियाज हुसैन द्वारा दायर जनहित याचिका सहित कुल 11 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-ई के मुताबिक, किसी भी पंचायत का कार्यकाल पांच साल से ज्यादा नहीं हो सकता। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि चुनावों में देरी करने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति को एक हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

प्रशासकों की नियुक्ति को बताया गलत, चुनाव आयोग को सौंपी कमान

अदालत ने साफ तौर पर कहा कि चुनाव प्रक्रिया का पूरा नियंत्रण और दिशा-निर्देश केवल राज्य चुनाव आयोग के पास होते हैं। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि ओबीसी आयोग की आरक्षण कोटा रिपोर्ट लंबित होने के कारण चुनावों में देरी हो रही है, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

वहीं, राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट को जानकारी दी कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को ही प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, बस सरकार की ओर से जरूरी व्यवस्थाओं का इंतजार है।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जब तक नए चुनाव नहीं हो जाते, तब तक वर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य जारी रख सकते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले 27 जून 2026 को जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने प्रशासकों की नियुक्ति के सरकारी आदेश को असंवैधानिक करार दिया था।

सूत्रों के मुताबिक, योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।

Share:

Comments

Leave a comment