छात्र की मौत मामला: जौनपुर के स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ SC/ST एक्ट रद्द, इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला

Shubham Singh11 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
छात्र की मौत मामला: जौनपुर के स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ SC/ST एक्ट रद्द, इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जौनपुर के एक स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ दर्ज एससी/एसटी (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण) एक्ट के मामले को रद्द कर दिया है। यह मामला एक छात्र की मौत से जुड़ा था, जिसमें प्रिंसिपल पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। जस्टिस संतोष राय की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया।

पूरा मामला सितंबर 2023 का है, जब कक्षा 10 के छात्र आयुष कुमार सरोज स्कूल से साइकिल पर घर लौट रहा था। रास्ते में अचानक वह गिर गया और उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता हीरालाल सरोज ने आरोप लगाया था कि स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल रमाकांत यादव की लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ। पिता का दावा था कि छात्र को एक घंटे तक कड़ी धूप में खड़ा रखा गया था, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ी। पुलिस ने जांच के बाद आईपीसी और एससी/एसटी एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल की थी, जिसे प्रिंसिपल ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

सिर्फ जाति सदस्य होने से नहीं बनता अपराध: कोर्ट

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का किसी विशेष समुदाय से होना ही एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध साबित करने के लिए काफी नहीं है। जस्टिस संतोष राय ने जोर देकर कहा कि इस एक्ट के तहत मामला तभी बनता है जब यह साबित हो कि अपराध विशेष रूप से पीड़ित की जाति के कारण किया गया है।

कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसी घटनाओं का सार्वजनिक स्थान पर होना जरूरी है और आरोपी का इरादा पीड़ित को उसकी जाति के आधार पर अपमानित या प्रताड़ित करने का होना चाहिए। केवल अपमानजनक भाषा का प्रयोग इस एक्ट को लागू करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।

इसी कड़ी में कोर्ट ने एक अन्य आदेश में महाराजगंज की एक विशेष एससी/एसटी कोर्ट के फैसले को भी पलट दिया, जिसमें एक सब-इंस्पेक्टर, कांस्टेबल और करीब 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट ने राज्य के सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने से पहले पुलिस के नजरिए और कानूनी प्रक्रियाओं पर गंभीरता से विचार करें, खासकर तब जब मामला आधिकारिक ड्यूटी के दौरान की गई कार्रवाई से जुड़ा हो।

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