गाजियाबाद: गुलमोहर ग्रीन्स में अवैध टावर गिराने का HC का आदेश, बिल्डर पर 25 लाख का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में अवैध टावरों को गिराने और बिल्डर पर 25 लाख का जुर्माना लगाने का सख्त आदेश दिया है।

Sushant Singh28 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
गाजियाबाद: गुलमोहर ग्रीन्स में अवैध टावर गिराने का HC का आदेश, बिल्डर पर 25 लाख का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद की गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में हुए अवैध निर्माण को लेकर एक बेहद सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) को आदेश दिया है कि सोसाइटी के अवैध टावर नंबर 27 और 28 को पूरी तरह से ध्वस्त किया जाए। इसके साथ ही टावर 16, 17, 18 और 19 की अवैध रूप से बनाई गई नौवीं और दसवीं मंजिल को भी दो महीने के भीतर गिराने का निर्देश दिया गया है।

अदालत ने बिल्डर की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए उस पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि एक महीने के भीतर रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (GGRWA) के खाते में जमा करनी होगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण गिराने में जो भी खर्च आएगा, उसकी वसूली प्रमोटर से भू-राजस्व बकाया के रूप में की जाएगी। साथ ही, पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे इस कार्रवाई के दौरान GDA को पूरी सुरक्षा मुहैया कराएं।

GDA अधिकारियों की लापरवाही पर कोर्ट की फटकार

सुनवाई के दौरान जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की डिवीजन बेंच ने GDA अधिकारियों की घोर लापरवाही पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की ढिलाई की वजह से यहां के निवासियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। इस लापरवाही के लिए GDA को निर्देश दिया गया है कि वह प्रत्येक याचिकाकर्ता को 50,000 रुपये का हर्जाना दे।

मामले में धोखाधड़ी और यूपी अपार्टमेंट एक्ट के उल्लंघन के गंभीर आरोप हैं, जिस पर कोर्ट ने दो हफ्ते के भीतर प्रमोटर के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। इस पूरे मामले की जांच अब एडिशनल सीपी रैंक के अधिकारी करेंगे। कोर्ट ने फायर NOC और कंप्लीशन सर्टिफिकेट न होने पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की और कॉमन एरिया की अवैध बिक्री को गलत ठहराया।

इस बीच, कोर्ट ने जांच अधिकारी सुरेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है, जिन्होंने 2018 की FIR में बिना किसी उचित जांच के बिल्डर को क्लीन चिट दे दी थी। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।

पीड़ित खरीदारों को राहत देते हुए अदालत ने आदेश दिया है कि बिल्डर 85 खरीदारों का पैसा 10 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस लौटाए।

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