सिख समुदाय पर टिप्पणी मामला: राहुल गांधी के खिलाफ FIR की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिख समुदाय पर कथित टिप्पणी को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की याचिका को खारिज कर दिया है।

Shubham Singh5 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
सिख समुदाय पर टिप्पणी मामला: राहुल गांधी के खिलाफ FIR की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने की खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला सिख समुदाय के बारे में राहुल गांधी द्वारा की गई कथित विवादित टिप्पणियों से जुड़ा था। जस्टिस विक्रम डी चौहान की एकल पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया, जिससे याचिकाकर्ताओं को बड़ा झटका लगा है।

यह कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा और अन्य लोगों ने सारनाथ पुलिस स्टेशन में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। जब पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की, तो याचिकाकर्ता अदालत का दरवाजा खटखटाने पहुंचे। इससे पहले वाराणसी की एक अदालत ने भी इस आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि कथित टिप्पणी अमेरिका में की गई थी, इसलिए यह अदालत के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

क्या था पूरा विवाद और अदालती कार्यवाही?

विवाद की जड़ राहुल गांधी की 2024 की अमेरिका यात्रा के दौरान दिया गया एक बयान था। उन्होंने वहां कहा था कि भारत में सिख समुदाय के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि क्या उन्हें पगड़ी और कड़ा पहनने का अधिकार होगा और क्या वे गुरुद्वारे जा सकेंगे। राहुल गांधी ने आगे कहा था कि यह चिंता केवल सिखों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के लोगों में है। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि वे भारत की विविधता और 'यूनियन' की अवधारणा को स्वीकार नहीं करते हैं।

इस बयान के बाद नागेश्वर मिश्रा ने कानूनी मोर्चा खोला। मामला कई अदालतों के चक्कर काटता हुआ इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी ने दलीलें पेश कीं, जबकि राज्य सरकार की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल पेश हुए।

दूसरी ओर, राहुल गांधी ने अपना लिखित जवाब दाखिल करते हुए इन आरोपों को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित बताया था। उन्होंने खुद को एक सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा कि उनके मन में सिख समुदाय सहित सभी धर्मों और समुदायों के लिए गहरा सम्मान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयानों का उद्देश्य सिखों के हितों और उनके योगदान को रेखांकित करना था, न कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना।

हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब खारिज करते हुए मामले का अंत कर दिया गया है।

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