इलाहाबाद हाई कोर्ट में तोड़फोड़: 'वकील थे या हिंसक भीड़?', कोर्ट ने दिए FIR के आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोर्टरूम में तोड़फोड़ और हमले पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने दोषियों के खिलाफ FIR और अवमानना कार्रवाई की सिफारिश की है।

प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने ही कोर्टरूम नंबर 49 में हुई तोड़फोड़ और हमले की घटना पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस पूरी घटना को न्यायपालिका की गरिमा और कानून के शासन पर सीधा हमला करार दिया है। जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की डिवीजन बेंच ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए एक विस्तृत 29 पन्नों का आदेश जारी किया है, जिसमें प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि वे वकीलों से निपट रहे थे या किसी ऐसी हिंसक भीड़ से, जो केवल तबाही मचाने पर उतारू थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सद्भाव बनाए रखने के नाम पर हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि हिंसा को बढ़ावा देने से अदालतें ब्लैकमेलिंग का शिकार हो सकती हैं।
दोषियों पर गिरेगी गाज, सोशल मीडिया पर झूठ फैलाने वालों पर भी होगी कार्रवाई
रजिस्ट्रार जनरल की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर कोर्ट ने पुष्टि की है कि कोर्टरूम के भीतर व्यापक तोड़फोड़ की गई और सरकारी counsels के साथ मारपीट हुई। इस घटना के बाद हाई कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश को निम्नलिखित सिफारिशें भेजी हैं:
- हिंसा और तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार वकीलों के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही शुरू की जाए।
- हिंसा भड़काने, आपराधिक साजिश रचने और कोर्टरूम को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए।
- सोशल मीडिया पर कोर्ट और जजों की छवि खराब करने के लिए झूठ और भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ भी FIR दर्ज की जाए।
- न्यायपालिका के प्रति असंतोष पैदा करने वाले और कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालने वाले सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक और डिलीट कराया जाए।
कोर्ट ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आधे सच और झूठ का एक ऐसा जाल बुना गया, जिससे हाई कोर्ट की छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई। अब इन सभी सिफारिशों को अंतिम निर्णय के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है।