'न कानून अनुमति देता है न संविधान', हिरासत में लिए लोगों की रिहाई पर अखिलेश यादव ने भाजपा को घेरा

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रंका समेत कई अन्य लोगों की तत्काल रिहाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें अनावश्यक रूप से हिरासत में रखा गया है। अखिलेश यादव का आरोप है कि भाजपा प्रशासन पर दबाव बना रही है ताकि इन लोगों को जेल में ही रखा जा सके, जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक है।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारे देश के कानून और संविधान, दोनों ही इस तरह की हिरासत की अनुमति नहीं देते हैं। उन्होंने इस मामले में वीडियो साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि पूरी सच्चाई सबके सामने है और प्रेस के पास भी इसके सबूत मौजूद हैं।
वोटर लिस्ट की सटीकता और आगामी रणनीति
पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख ने आने वाले चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई बेहद कठिन होने वाली है और देश का भविष्य इस पर टिका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश ही देश को बचाने की क्षमता रखता है और इसके लिए समाजवादियों को जिम्मेदारी उठानी होगी।
अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि उनका प्राथमिक लक्ष्य वोटर लिस्ट की सटीकता सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा:
- वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी जीत के रास्ते में बाधा बन सकती है।
- एसएसआर (SSR) प्रक्रिया खत्म होने के बाद सूचियों में कोई संशोधन संभव नहीं होगा।
- नामांकन के दिन तक कार्यकर्ताओं को पूरी सतर्कता बरतनी होगी ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए।
साथ ही, उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि समाजवादी पार्टी अपना चुनावी घोषणापत्र 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' के अवसर पर जारी करेगी।
भाजपा पर तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने "एक कचोरी, एक समोसा, भाजपा का कोई नई भरोसा" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटों की कथित चोरी के मुद्दे पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने दावा किया कि सपा कार्यकर्ताओं के प्रयासों के कारण ही चुनाव आयोग को अपनी प्रक्रियात्मक गलतियों को स्वीकार करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि जब लोगों को न्याय नहीं मिलता, तो उनका गुस्सा विरोध प्रदर्शनों के रूप में बाहर आता है।