वोटर लिस्ट में धांधली का आरोप, अखिलेश यादव ने की आधार लिंकिंग और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की मांग
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए आधार लिंकिंग और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की मांग की है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ी मांग उठाई है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से अपील की है कि वोटर लिस्ट को आधार कार्ड से जोड़ना अनिवार्य किया जाए और हर पोलिंग बूथ पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन मशीनें लगाई जाएं। अखिलेश यादव का मानना है कि जब तक यह प्रक्रिया अनिवार्य नहीं होगी, तब तक फर्जी वोटिंग और वोटर लिस्ट में हेरफेर को रोकना मुश्किल है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के जरिए वोटर लिस्ट में 'वोट फिक्सिंग' कर रही है। अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने लखनऊ की सरोजनी नगर और पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट में एक ही नाम की कई प्रविष्टियां मौजूद हैं। एक चौंकाने वाले उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया कि 'सुनीता पत्नी राजेश, उम्र 42 वर्ष' नाम की एक ही एंट्री 420 अलग-अलग जगहों पर दर्ज है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दो विशिष्ट नामों की जांच करने पर कुल 2,341 प्रविष्टियां मिलीं।
फर्जी वोटिंग रोकने के लिए तकनीक का सहारा जरूरी
सपा प्रमुख का तर्क है कि वर्तमान में निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई जा रही स्वैच्छिक लिंकिंग प्रणाली पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि फर्जी रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह खत्म करने के लिए आधार एकीकरण को अनिवार्य बनाना होगा और मतदान के समय फिंगरप्रिंट स्कैनर का उपयोग करना होगा। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने फॉर्म 6B के जरिए वोटर आईडी (EPIC) और आधार को जोड़ने की सुविधा दी है, लेकिन इसे वैकल्पिक रखा गया है ताकि किसी भी वैध मतदाता का नाम लिस्ट से न कटे।
अखिलेश यादव ने यह भी आशंका जताई कि फर्जी आधार कार्डों का इस्तेमाल करके अवैध रूप से वोट डाले जा सकते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि निर्वाचन आयोग ने विपक्षी दलों की चिंताओं पर ध्यान देना शुरू किया है, लेकिन उनका कहना है कि आने वाले चुनावों की शुचिता बनाए रखने के लिए अधिक व्यापक तकनीकी उपायों की आवश्यकता है।