अखिलेश यादव का वाराणसी प्रशासन पर हमला, बोले- शहर को देंगे मेट्रो और वरुणा रिवरफ्रंट
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वाराणसी प्रशासन पर धांधली का आरोप लगाया और शहर के लिए मेट्रो व वरुणा रिवरफ्रंट का विजन पेश किया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वाराणसी दौरे के दौरान स्थानीय प्रशासन और वर्तमान सरकार पर तीखा हमला बोला है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। अखिलेश यादव ने दावा किया कि मतगणना के दौरान उन्हें और उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को तीन दिनों और दो रातों तक जगाए रखा गया ताकि नतीजों में हेरफेर किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने चंडीगढ़ जैसी रणनीतियां अपनाने की कोशिश की, लेकिन वाराणसी में वे नाकाम रहे।
सपा प्रमुख ने इस जीत को बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद बताया और कहा कि मणिकर्णिका घाट की विरासत के साथ छेड़छाड़ करने वालों को सजा मिली है। उन्होंने शहर की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने वाराणसी को बाहरी ठेकेदारों के हवाले कर दिया है और स्थानीय किसानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
वाराणसी के लिए सपा का विजन: मेट्रो और मॉडल रिवरफ्रंट
शहर के विकास को लेकर अपनी योजना साझा करते हुए अखिलेश यादव ने बड़े वादे किए। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आती है, तो वाराणसी में मेट्रो सिस्टम लागू किया जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि अगर मेट्रो का काम पहले शुरू हुआ होता, तो दालमंडी इलाके में तोड़फोड़ की नौबत नहीं आती। इसके अलावा, उन्होंने वरुणा नदी के कायाकल्प का वादा करते हुए कहा कि इसे साबरमती रिवरफ्रंट से भी बेहतर मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
राजनीतिक समीकरणों पर बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि एमएलसी चुनावों के बाद लगभग 200 लोग अपने पदों से हाथ धो बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीटों के वितरण का मुख्य आधार चुनावी जीत होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने उन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि सपा के कुछ विधायक ओम प्रकाश राजभर के संपर्क में हैं।
2027 के विधानसभा चुनावों की ओर इशारा करते हुए अखिलेश यादव ने भविष्यवाणी की कि वर्तमान में वाराणसी का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी मंत्री अपना टिकट खो देंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा नीति को लेकर जनता में भाजपा के खिलाफ भारी नाराजगी है, जिसका असर आने वाले चुनावों में साफ तौर पर दिखेगा।