यूपी वोटर लिस्ट में भारी धांधली का दावा, अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग और भाजपा को घेरा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) के पुनरीक्षण कार्य को लेकर एक बड़ा धमाका किया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और भारत निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेरफेर की गई है। अखिलेश यादव के मुताबिक, यह कोई मामूली लिपिकीय गलती नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है ताकि फर्जी मतदान के जरिए चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सके।
इस धांधली का उदाहरण देते हुए सपा प्रमुख ने 'ज्ञानेश' नाम के एक व्यक्ति का जिक्र किया, जिसका नाम कथित तौर पर अलग-अलग स्थानों पर मतदाता सूची में 10 बार दर्ज पाया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही व्यक्ति के इतने सारे नाम कैसे हो सकते हैं और इसका इस्तेमाल फर्जी वोट डालने के लिए कैसे किया जा सकता है।
19 लाख फर्जी वोटरों का दावा और 2027 का चुनावी ऐलान
अखिलेश यादव ने बताया कि समाजवादी पार्टी ने इस गड़बड़ी को पकड़ने के लिए अपने 'पीडीए प्रहरी' कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारा था। पार्टी द्वारा किए गए स्वतंत्र ऑडिट में लगभग 19.2 लाख संदिग्ध फर्जी मतदाताओं की पहचान की गई है। सपा ने 100 विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े इन सबूतों को औपचारिक रूप से चुनाव आयोग को सौंप दिया है।
सपा अध्यक्ष ने पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए आए 16.18 लाख आवेदनों की प्रक्रिया को सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और स्पेशल समरी रिविजन (SSR) की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि भारी पैसा खर्च करने के बावजूद वोटर लिस्ट की शुद्धता से समझौता किया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए SSR का संबंध आरएसएस (RSS) से जोड़ा और दावा किया कि चुनाव आयोग भाजपा के प्रभाव में काम कर रहा है, जहाँ असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं और पक्षपाती प्रविष्टियाँ जोड़ी जा रही हैं।
इन तमाम विवादों और आरोपों के बीच, अखिलेश यादव ने एक बड़ी घोषणा भी की है। उन्होंने ऐलान किया कि समाजवादी पार्टी 26 नवंबर को 'संविधान दिवस' के अवसर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अपना घोषणापत्र जारी करेगी।