रामपुर जेल पहुंचे अखिलेश यादव, आजम खान से मुलाकात के बाद गरमाई यूपी की सियासत
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 11 महीने बाद रामपुर जेल में आजम खान से मुलाकात की, जिससे यूपी की राजनीति में हलचल मच गई है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त एक बड़ा मोड़ आया जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर जेल जाकर वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की। 22 अक्टूबर 2026 को हुई यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चली। खास बात यह है कि पिछले 11 महीनों से दोनों नेताओं के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई थी। आजम खान 17 नवंबर 2025 से जेल में बंद हैं और इससे पहले उनकी आखिरी मुलाकात 7 नवंबर 2025 को लखनऊ में हुई थी।
इस मुलाकात ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व ने जेल में बंद अपने दिग्गज नेता से मिलने में इतनी लंबी देरी क्यों की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले यह एक सोची-समझी रणनीति है, ताकि मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट किया जा सके और आजम खान की कथित नाराजगी को दूर किया जा सके।
चुनावी रणनीति और राजनीतिक समीकरण
माना जा रहा है कि इस बंद कमरे की मुलाकात में जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मुद्दों, आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे और रामपुर के सांसद मोहिब उल्लाह नादवी के राजनीतिक प्रदर्शन पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने आजम खान के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "आजम थे, हैं और रहेंगे आजम।"
यह मुलाकात अखिलेश यादव की उस कोशिश का हिस्सा दिखती है, जिसमें उन्होंने अक्टूबर की शुरुआत में आजम खान की पत्नी डॉ. तज़ीन फातिमा से भी मुलाकात की थी। हालांकि, मीडिया में यह खबर उड़ी थी कि डॉ. फातिमा ने 15 विधानसभा सीटों की कोई सूची सौंपी है, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से इन दावों को खारिज करते हुए इसे केवल एक पारिवारिक मुलाकात बताया था।
दूसरी ओर, विपक्ष ने इस मुलाकात को महज एक 'चुनावी स्टंट' करार दिया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि सपा केवल मुस्लिम मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। साथ ही, सपा पर दबाव इस बात का भी है कि एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पहले ही पार्टी पर आजम खान की अनदेखी करने का आरोप लगा चुके हैं।