वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप: अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को बताया BJP का मोहरा

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह संवैधानिक संस्था अब स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय भारतीय जनता पार्टी (BJP) के निर्देशों पर चल रही है। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जब भी जनता के बीच भाजपा का समर्थन कम होता है, तो वह चुनाव आयोग को अपनी ढाल की तरह इस्तेमाल करती है।
अखिलेश यादव ने लोकतंत्र की स्थिति पर चिंता जताते हुए सवाल उठाया कि जंतर-मंतर जैसे विरोध प्रदर्शन के केंद्रों पर पाबंदियां क्यों लगाई जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और चुनाव आयोग के बीच एक ऐसा तालमेल है, जिसका मकसद लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करना और वैध मतदाताओं के नामों को वोटर लिस्ट से हटाना है।
19 लाख फर्जी वोटरों का दावा और 'PDA प्रहरी' अभियान
सपा प्रमुख ने बताया कि उनकी पार्टी ने 'PDA प्रहरी' नामक एक विशेष अभियान चलाया है। इस अभियान के जरिए पार्टी का दावा है कि उन्होंने वोटर लिस्ट में 19 लाख से अधिक फर्जी प्रविष्टियां पकड़ी हैं। इसी कड़ी में 18 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें विशेष रूप से MLC चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया कि कई नाम वोटर लिस्ट में तीन से पांच बार दर्ज हैं, जो पूरी तरह गलत है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
आने वाले 24 अक्टूबर को होने वाले विशेष वोटर लिस्ट अभियान को लेकर अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी कार्यकर्ता पूरी सतर्कता बरतें ताकि फर्जी मतदाताओं का पंजीकरण न हो सके।
दूसरी ओर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के समूहों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इन तमाम आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने अपना रुख सख्त रखा है। आयोग ने डुप्लीकेट प्रविष्टियों पर कार्रवाई करने की बात कही है और 24 अक्टूबर के आउटरीच अभियान की तैयारी तेज कर दी है, जिसमें पहली बार वोट देने वालों, महिलाओं और दिव्यांगों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, फॉर्म-6 को दोबारा जमा करने के आदेश से जुड़ी कानूनी चुनौती पर 28 अक्टूबर को सुनवाई होनी तय है।