धीरेंद्र शास्त्री के यूपी कार्यक्रमों पर रोक की मांग, अखिलेश यादव ने जताया कड़ा विरोध
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के यूपी कार्यक्रमों पर रोक लगाने की मांग की है। जानें क्या है पूरा विवाद।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश प्रशासन से मांग की है कि राज्य में धीरेंद्र शास्त्री के आगामी सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति न दी जाए। सपा प्रमुख का यह विरोध शास्त्री द्वारा कथित तौर पर भगवान कृष्ण और भगवान राम के वंश से जुड़ी विवादित टिप्पणियों को लेकर है।
लखनऊ में बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री की बातों से 'यदुवंशी' और 'रघुवंशी' दोनों समुदायों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने विशेष रूप से नवंबर और दिसंबर में होने वाले कार्यक्रमों पर चिंता जताई है। अखिलेश ने प्रशासन को आगाह किया कि अंबेडकर नगर, कुंडा, गोंडा, झांसी, लखनऊ और आगरा जैसे जिलों में होने वाले आयोजनों पर कड़ी नजर रखी जाए। उनका तर्क है कि जो व्यक्ति सामाजिक वैमनस्य फैलाता हो, उसे सार्वजनिक सभाओं की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए ताकि सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे।
विवाद की जड़ और राजनीतिक प्रतिक्रिया
यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी में 30 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 के बीच आयोजित एक राम कथा के दौरान शुरू हुआ, जहां कथित तौर पर शास्त्री ने देवी-देवताओं की तुलना की थी। इसके अलावा, अखिलेश यादव ने शास्त्री का एक पुराना वीडियो भी साझा किया है, जिसमें वे कथित तौर पर भगवान राम के 'पांच पिताओं' की चर्चा कर रहे हैं।
विरोध के सुर इतने तेज हो गए कि 4 नवंबर 2026 को अखिलेश यादव ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बोर्ड लगाए जाने चाहिए, ताकि 'ईशनिंदा' करने वालों का प्रवेश रोका जा सके। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो नेपाल बॉर्डर की निगरानी भी की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, इस बयान के बाद हिंदू महासभा के सदस्यों ने 4 नवंबर को आगरा में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अखिलेश यादव के रुख की निंदा की और उन्हें चुनौती देते हुए 6 दिसंबर को मथुरा आने को कहा। हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री ने पहले ही सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा था कि उनकी बातों का गलत अर्थ निकाला गया और उनका उद्देश्य किसी भी देवता का अपमान करना नहीं था। इसके बावजूद, अखिलेश यादव अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और यूपी में उनके सभी भविष्य के कार्यक्रमों को रद्द करने का दबाव बना रहे हैं।