यूपी पंचायत चुनाव में देरी पर अखिलेश यादव का हमला, बोले- सरकार की नीयत में खोट

उत्तर प्रदेश में त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनावों में हो रही देरी को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो अब तक चुनाव संपन्न हो चुके होते। अखिलेश यादव ने यह भी संकेत दिया कि जनता अब सब देख रही है और वह तय करेगी कि सरकार को कैसे बदला जाए।
हाईकोर्ट के आदेश और सरकार की दलीलें
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर, 2026 को एक सख्त निर्देश जारी किया। कोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग (SEC) को आदेश दिया कि पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर पूरे किए जाएं। यह आदेश दशरथ यादव द्वारा दायर एक याचिका पर आया था। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि चुनाव मौजूदा आरक्षण ढांचे के तहत ही होंगे, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण शामिल है, और इसके लिए ओबीसी आयोग के काम पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा।
हैरानी की बात यह है कि राज्य चुनाव आयोग ने 10 जून, 2026 को ही मतदाता सूची प्रकाशित कर अपनी तैयारी पूरी कर ली थी, लेकिन सरकारी इंतजामों की कमी के कारण यह प्रक्रिया अटक गई। दूसरी ओर, पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कोर्ट के आदेश के बाद कहा कि सरकार इस फैसले की समीक्षा कर रही है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव, जनगणना और यूपी बोर्ड की परीक्षाओं जैसे कारणों का हवाला दिया है।
मामला यहीं नहीं रुकता, नेशनल पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह ने भी इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरक्षण और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। संगठन का अनुमान है कि अब ये चुनाव अप्रैल 2027 से पहले होना मुश्किल नजर आते हैं।