लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज पर अखिलेश यादव के विवादित पोस्टर, मचा बवाल

लखनऊ में अखिलेश यादव को निशाना बनाने वाले विवादित पोस्टर लगे, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

Shubham Singh23 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज पर अखिलेश यादव के विवादित पोस्टर, मचा बवाल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर राजनीतिक घमासान का केंद्र बन गई है। शहर के नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे पर समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव विवादित पोस्टर के कारण चर्चाओं में हैं। यहां अचानक कुछ ऐसे पोस्टर लगाए गए जिनमें सपा प्रमुख को निशाना बनाया गया है, जिसके बाद से इलाके में काफी गहमागहमी देखी जा रही है। फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है कि आखिर ये पोस्टर किसने और किस मकसद से लगाए थे।

हैरानी की बात यह है कि लखनऊ में यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव को लेकर इस तरह की हरकतें हुई हों। इससे पहले 18 अक्टूबर 2026 को भी शहर के कई प्रमुख इलाकों में विवादित पोस्टर चिपकाए गए थे। उन पोस्टरों में अखिलेश यादव के साथ राहुल गांधी, आतिक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान जैसे चेहरों को दिखाया गया था, और साथ ही एलन मस्क की तस्वीर भी थी। इन पोस्टरों पर "सनातन भारत के रावण विरोधी" का नारा लिखा था, जिसे 'सनातन रक्षा संगठन' से जोड़ा गया था। उस समय समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इसे सत्ताधारी दल की एक सोची-समझी साजिश और ध्यान भटकाने वाला तरीका बताया था, जिसके बाद पुलिस और नगर निगम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें हटवा दिया था।

पुराने विवादों ने फिर पकड़ी रफ्तार

राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का यह सिलसिला काफी पुराना है। मई 2026 में भी लखनऊ के बांग्ला बाजार, पुरानी जेल रोड और केडी सिंह बाबू स्टेडियम जैसे इलाकों में सपा नेतृत्व के खिलाफ होर्डिंग्स लगाए गए थे। उन पोस्टरों में अखिलेश यादव को "कटियाबाज" कहा गया था और उन पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाया गया था। उन पोस्टरों में आजम खान और संभल सांसद जिया-उर-रहमान बरक को भी बिजली चोरी से जोड़ा गया था और "रमजान में बिजली फुल, दिवाली पर बिजली गुल" जैसे तीखे नारे लिखे थे। उस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने भारी आक्रोश जताते हुए उन पोस्टरों को फाड़ दिया था।

अब एक बार फिर नेशनल पीजी कॉलेज के पास हुए इस घटनाक्रम ने शहर के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस बार इन पोस्टरों के पीछे के चेहरों को बेनकाब कर पाता है या नहीं।

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