अखिलेश यादव पहुंचे अयोध्या, राम मंदिर नहीं जाने पर छिड़ा सियासी घमासान

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव 8 अक्टूबर 2026 को अयोध्या पहुंचे। वह पूर्व मंत्री और पार्टी प्रत्याशी तेज नारायण पांडे (पवन पांडे) के आवास पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में शामिल होने आए थे। इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर अखिलेश यादव ने 'व्यास पूजन' में हिस्सा लिया। हालांकि, इस दौरे ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है, क्योंकि अयोध्या आने के बावजूद सपा प्रमुख राम मंदिर नहीं गए।
अखिलेश यादव के मंदिर न जाने के फैसले पर राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। जगद्गुरु परमहंस आचार्य और हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य जैसे प्रमुख संतों ने उन्हें मंदिर जाने का आग्रह किया। परमहंस आचार्य ने यहां तक कहा कि मंदिर न जाना सनातन धर्म के प्रति अनादर के रूप में देखा जा सकता है। वहीं, बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व याचिकाकर्ता इकबाल अंसारी ने भी उन्हें मंदिर स्थल पर आने का निमंत्रण दिया था।
योगी आदित्यनाथ को दी चुनौती, साifai मंदिर का दिया हवाला
विवादों के बीच अखिलेश यादव ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह राम मंदिर तभी जाएंगे, जब उनके पैतृक गांव सैफई (इटावा) में निर्माणाधीन केदारेश्वर शिव मंदिर का उद्घाटन हो जाएगा। इस दौरान उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला बोला। अखिलेश ने सीएम योगी को चुनौती दी कि वह आगामी विधानसभा चुनाव अयोध्या सीट से लड़ें। उन्होंने दावा किया कि आंतरिक सर्वे के अनुसार भाजपा को इस क्षेत्र में योग्य उम्मीदवार खोजने में मुश्किल हो रही है।
भागवत कथा के महत्व पर चर्चा करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि यह शास्त्र हमें जातिवाद, छुआछूत और सत्ता के मोह जैसी सामाजिक बेड़ियों से मुक्ति की सीख देता है। दूसरी ओर, भाजपा ने अखिलेश के इस दौरे को 'वोट बैंक की राजनीति' करार दिया है, जबकि समाजवादी पार्टी का कहना है कि वह केवल निमंत्रण पर कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।