चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं, इसकी बिल्डिंग पर भाजपा का झंडा होना चाहिए: अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उस पर सीधा हमला बोला है। सैफई (इटावा) में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की चौथी पुण्यतिथि के अवसर पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भारत का चुनाव आयोग अब निष्पक्ष नहीं रहा। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि आयोग का झुकाव पूरी तरह से सत्ता पक्ष की ओर है और इसे अब अपनी बिल्डिंग पर भाजपा का झंडा लगा लेना चाहिए।
सपा प्रमुख ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों के दौरान आयोग ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ियां की गई हैं, जिसमें फर्जी हस्ताक्षर और मतदाताओं के नामों को हटाने या गलत तरीके से जोड़ने जैसे मामले शामिल हैं। अखिलेश यादव ने मिल्कीपुर उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पुलिस अधिकारियों ने डराने-धमकाने की कोशिश की ताकि मतदान में बाधा डाली जा सके।
लोकतंत्र बचाने की लड़ाई और आयोग का बचाव
अखिलेश यादव ने दिल्ली में 'INDIA' गठबंधन के सदस्यों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया, जो वोटर लिस्ट में विसंगतियों के खिलाफ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें उनका पूरा नैतिक समर्थन प्राप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं और यदि वर्तमान सरकार फिर से आई, तो वोट देने के मौलिक अधिकार पर खतरा मंडरा सकता है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह पूरी तरह से संविधान और चुनावी कानूनों के अनुसार काम कर रहा है। आयोग का कहना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) जैसी प्रक्रियाएं पारदर्शी और सुरक्षित हैं। वहीं, 124 पूर्व आईएएस और आईएफएस अधिकारियों ने भी आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया है। भाजपा ने अखिलेश यादव के बयानों की कड़ी निंदा करते हुए उनसे माफी की मांग की है और इसे चुनावी परिणामों के प्रति उनका पाखंड करार दिया है।