'भाजपा खुद अराजकता है', वाराणसी में अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरा
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने वाराणसी में भाजपा के मार्च पर पलटवार करते हुए EVM और शहर की बदहाली को लेकर तीखे सवाल दागे हैं।

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च पर कड़ा प्रहार किया है। वाराणसी पहुंचे सपा प्रमुख ने सीधे तौर पर कहा कि भाजपा खुद 'अराजकता' का प्रतीक है और देश के लिए असली संकट केवल भाजपा ही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस संकट का एकमात्र समाधान भाजपा को सत्ता से हटाना है।
अखिलेश यादव ने चुनाव प्रक्रिया और EVM पर अपनी पुरानी जिद दोहराते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से पेपर बैलेट (कागजी मतपत्र) के पक्ष में रही है। उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अगर उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर सपा EVM के जरिए जीत भी जाए, तब भी वे EVM का विरोध करना बंद नहीं करेंगे। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि दुनिया का नंबर एक देश होने के बावजूद वहां पेपर बैलेट से वोटिंग होती है, तो भारत में इसे क्यों नहीं अपनाया जाता? उनके मुताबिक, EVM के जरिए वोट डालना असंवैधानिक है।
वाराणसी की बदहाली और PDA की परिभाषा पर बोले अखिलेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की स्थिति पर तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि जिस शहर को 'क्योटो' बनाने के दावे किए गए थे, वहां आज ट्रैफिक जाम, गंदगी और पीने के साफ पानी की किल्लत है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का अपना क्षेत्र होने के बावजूद सड़कें स्विमिंग पूल बन चुकी हैं। उन्होंने तंज कसा कि अगर विकास नहीं हो सका, तो कम से कम शहर में विकास की तस्वीरें या होर्डिंग्स ही लगा दिए जाते।
इस दौरान उन्होंने अपने चर्चित 'PDA' फॉर्मूले को और विस्तार से समझाया। अखिलेश ने बताया कि PDA का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है। उन्होंने साफ किया कि इसमें केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि जैन, बौद्ध, पारसी, सिख और ईसाई भी शामिल हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोई भी व्यक्ति जो उत्पीड़न, अपमान या पीड़ा झेल रहा है, वह इस समूह का हिस्सा है, चाहे वह किसी भी जाति का हो, यहाँ तक कि पीड़ित ब्राह्मण भी PDA का हिस्सा हैं।
गौरतलब है कि यह बयान उस समय आया है जब भाजपा ने चुनाव आयोग के मतदाता सूची पुनरीक्षण के विरोध में विपक्षी प्रदर्शनों के जवाब में देशव्यापी मार्च शुरू किया है। वहीं, राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिए गए बयानों के बाद राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है।