आकांक्षा दुबे मौत मामला: CBI जांच की याचिका खारिज, हाई कोर्ट ने कहा- हत्या का दावा निराधार

Shubham Singh14 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
आकांक्षा दुबे मौत मामला: CBI जांच की याचिका खारिज, हाई कोर्ट ने कहा- हत्या का दावा निराधार

भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की मौत के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले की निष्पक्ष जांच और सीबीआई (CBI) जांच की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस घटना को हत्या बताने के तर्क निराधार हैं, क्योंकि पुलिस ने पहले ही आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to suicide) की धारा में चार्जशीट दाखिल कर दी है।

यह पूरा मामला वाराणसी के सारनाथ पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार II की खंडपीठ ने अभिनेत्री की मां मधु दुबे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता के वकील सौरभ तिवारी ने अदालत के सामने कुछ तस्वीरें पेश कीं और दावा किया कि मौत के समय शरीर की स्थिति और कलाई पर चोट के निशान यह संकेत देते हैं कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी।

DNA रिपोर्ट और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान वकील ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मृतका के शरीर और कपड़ों से स्पर्मेटोज़ोआ बरामद हुआ था और FSL DNA रिपोर्ट में एक व्यक्ति का DNA मैच हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन थाना प्रभारी (SHO) ने इस महत्वपूर्ण जानकारी को कोर्ट के सामने दाखिल हलफनामे में जानबूझकर छिपाया, जो पुलिस की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि एफआईआर में दर्ज तथ्य मृतका की मां से जबरन लिखवाए गए थे।

दूसरी ओर, विपक्षी वकील ने दलील दी कि पुलिस ने आईपीसी की धारा 306 के तहत चार्जशीट दाखिल की है और मजिस्ट्रेट ने इस पर संज्ञान ले लिया है। कोर्ट ने जब याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की दोबारा जांच के लिए जिला मजिस्ट्रेट को आवेदन दिया या चार्जशीट के खिलाफ कोई विरोध याचिका (Protest Petition) दायर की, तो वकील ने स्वीकार किया कि ऐसा नहीं किया गया है।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और उसके खिलाफ कोई कानूनी विरोध याचिका नहीं दी गई, तो अब इसे हत्या बताने का तर्क बेबुनियाद है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मृतका का शरीर उपलब्ध न होने की स्थिति में मौत के कारणों की दोबारा जांच संभव नहीं है। इसी के साथ अदालत ने याचिका को निस्तारित कर दिया।

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