अजय राय ने भाजपा में जाने की अफवाहों को नकारा, बोले- मैं कांग्रेस का सिपाही हूं

Sushant Singh17 October 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
अजय राय ने भाजपा में जाने की अफवाहों को नकारा, बोले- मैं कांग्रेस का सिपाही हूं

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर चर्चाएं तेज थीं कि पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अब खुद अजय राय ने इन तमाम अटकलों पर पूर्णविराम लगा दिया है। वाराणसी से बात करते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि उनके भाजपा में जाने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं और वह कांग्रेस के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।

अजय राय ने अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि वह खुद को कांग्रेस का एक सिपाही मानते हैं और किसी भी कीमत पर अपनी पार्टी का साथ नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके लिए पार्टी की विचारधारा और सम्मान किसी भी सरकारी पद या कैबिनेट मंत्री बनने के लालच से कहीं ऊपर है।

2027 के लिए पिंडरा से चुनाव लड़ने का किया ऐलान

भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए अजय राय ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव वाराणसी की पिंडरा सीट से लड़ेंगे और उन्हें पूरा भरोसा है कि वह वहां भाजपा को मात देंगे। अपनी राजनीतिक यात्रा को याद करते हुए उन्होंने बताया कि 1996 में जब वह पहली बार पिंडरा से विधायक चुने गए थे, तब वह सबसे कम उम्र के विधायकों में से एक थे।

उस दौर का जिक्र करते हुए राय ने खुलासा किया कि तब राज्य में बसपा की सरकार थी और मायावती ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने बताया कि बसपा नेता नसीमउद्दीन सिद्दीकी ने मायावती के कहने पर उनसे कई बार संपर्क किया था। उस समय वह निर्दलीय विधायक थे, लेकिन उन्होंने मंत्री पद के बजाय कांग्रेस का साथ चुनना बेहतर समझा और तब से अब तक इसी पार्टी में डटे हुए हैं।

भाजपा पर निशाना साधते हुए अजय राय ने आरोप लगाया कि 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर 2024 तक भाजपा लगातार उन्हें अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने भाजपा की कार्यशैली की तुलना एक 'मछुआरे' से करते हुए कहा कि यह पार्टी देशभर के नेताओं को प्रलोभन देकर अपने पाले में लाने का काम करती है। साथ ही उन्होंने भाजपा पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप भी लगाया।

अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के भीतर उन्हें जो प्यार और समर्थन मिलता है, वही उनकी असली ताकत है। ऐसे में किसी अन्य राजनीतिक संगठन में शामिल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

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