आगरा एमएलसी चुनाव में धांधली: 6 अधिकारी निलंबित, 21 कर्मियों पर गिरी गाज
आगरा एमएलसी चुनाव में धांधली और लापरवाही के आरोप के बाद चुनाव आयोग ने 6 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। जानें पूरा मामला।

आगरा एमएलसी चुनाव अनियमितताएं को लेकर चुनाव आयोग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। आगरा मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भारी लापरवाही और supervisory negligence (पर्यवेक्षण में चूक) पाए जाने के बाद आयोग ने 6 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इतना ही नहीं, 21 अन्य कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। यह पूरा मामला उस समय गरमाया जब मतदान केंद्रों पर व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम अधिकारियों की रिपोर्ट सामने आई।
दरअसल, यह कार्रवाई आगरा मंडल आयुक्त नागेंद्र प्रताप द्वारा 25 अक्टूबर को सौंपी गई औपचारिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। रिपोर्ट में गंभीर खामियों का जिक्र था, जिसके बाद आयोग ने 26 अक्टूबर को कड़े आदेश जारी किए। गड़बड़ियों की गंभीरता को देखते हुए खेरागढ़ (बूथ 20), सैयान (बूथ 21) और फतेहाबाद (बूथ 26) के मतदान केंद्रों पर हुई शुरुआती वोटिंग को रद्द कर दिया गया और वहां दोबारा मतदान कराना पड़ा।
इन अधिकारियों पर हुई बड़ी कार्रवाई
निलंबन की लिस्ट में पुलिस और प्रशासन दोनों के बड़े नाम शामिल हैं। सैयान (बूथ 21) से सेक्टर मजिस्ट्रेट ओ.पी. चक, क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर हरिशरण सिंह और सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार को सस्पेंड किया गया है। वहीं, फतेहाबाद (बूथ 26) से सेक्टर मजिस्ट्रेट विशाल राठौर, इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम पाल और सब-इंस्पेक्टर सुमित त्यागी पर निलंबन की गाज गिरी है। इन सभी को विभागीय जांच का सामना करना होगा और अगले 10 दिनों के भीतर चार्जशीट का ड्राफ्ट आयोग को भेजना होगा।
सिर्फ बड़े अधिकारी ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों पर भी शिकंजा कसा गया है। बूथ 21 और 26 पर तैनात 21 अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है, जिनमें दो पीठासीन अधिकारियों समेत 5 पोलिंग ऑफिसर और 16 पुलिसकर्मी (5 हेड कांस्टेबल और 11 कांस्टेबल) शामिल हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आकाश अग्रवाल की शिकायत थी। उन्होंने बूथ कैप्चरिंग और अधिकारियों के दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे। इस घटना ने जिला मजिस्ट्रेट मनीष बंसल और पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।