मुजफ्फरनगर: फास्ट ट्रैक कोर्ट के एडीजे रवि दिवाकर का तबादला, अब फैमिली कोर्ट में संभालेंगे कमान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एडीजे रवि दिवाकर का तबादला मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट से फैमिली कोर्ट कर दिया है। जानें क्या है पूरा मामला।

Sushant Singh24 October 20261 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
मुजफ्फरनगर: फास्ट ट्रैक कोर्ट के एडीजे रवि दिवाकर का तबादला, अब फैमिली कोर्ट में संभालेंगे कमान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए मुजफ्फरनगर के फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) रवि दिवाकर का तबादला कर दिया है। अब उन्हें इसी जिले के फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं देनी होंगी। रजिस्ट्रार जनरल मंजीत सिंह शेoran द्वारा 23 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के बाद यह बदलाव प्रभावी हुआ है।

न्यायाधीश रवि दिवाकर की जगह अब फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर 3 की जिम्मेदारी जज शिव कुमारी को सौंपी गई है, जबकि महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई अब जज मंजुला भलोटिया करेंगी।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में रहा चर्चित कार्यकाल

रवि दिवाकर का मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्यकाल काफी चर्चाओं में रहा। 29 नवंबर 2025 से यहां तैनात दिवाकर ने महज साढ़े आठ महीनों के भीतर हत्या के मामलों में 23 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। अगर उनके पूरे 17 साल के न्यायिक करियर की बात करें, तो उन्होंने अब तक कुल 35 मामलों में मृत्युदंड दिया है, जिसमें मुजफ्फरनगर से पहले अन्य जिलों के 13 मामले शामिल हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन सभी सजाओं की पुष्टि हाईकोर्ट द्वारा की जानी बाकी है और दोषियों के पास अपील का संवैधानिक अधिकार है।

तबादले से पहले उनका कार्यकाल प्रशासनिक तनावों से भी घिरा रहा। अगस्त 2026 में जिला जज ने उनके कोर्ट से 97 हत्या के मामलों की फाइलें वापस ले ली थीं, जिस पर जज दिवाकर ने प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए एक फैसला भी जारी किया था।

गौरतलब है कि रवि दिवाकर इससे पहले ज्ञानवापी मस्जिद मामले में अपने फैसलों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। उस दौरान उन्हें सुरक्षा संबंधी धमकियां भी मिली थीं और उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक रूप से चिंता जाहिर की थी।

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