यूपी में निवेश बढ़ाएगा आदित्य बिड़ला ग्रुप, कुमार मंगलम बिड़ला ने जताया भरोसा
आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने उत्तर प्रदेश में नए निवेश की योजना जाहिर की है। पूरी खबर के लिए पढ़ें।

वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने उत्तर प्रदेश के प्रति अपने गहरे जुड़ाव को साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रुप राज्य में अपने मौजूदा औद्योगिक footprint को और विस्तार देने की तैयारी में है और आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में निवेश की नई योजनाएं लागू की जाएंगी।
दरअसल, कुमार मंगलम बिड़ला शनिवार को आईआईटी (बीएचयू) के 15वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने वाराणसी पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि उनका ग्रुप पहले से ही राज्य में काफी सक्रिय है और यहां कई उद्योग संचालित कर रहा है। हालांकि, उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया कि यह नया निवेश कितने करोड़ का होगा, किस समय सीमा में किया जाएगा या किन खास सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इंडस्ट्री और शिक्षा के बीच 'पुल' बनाने की जरूरत
इस मौके पर बिड़ला ने केवल निवेश की बात नहीं की, बल्कि भारत के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इंडस्ट्री और एकेडेमिया (शैक्षणिक संस्थानों) के बीच एक बड़ी खाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय संस्थान अब बहुत उच्च स्तर का शोध (रिसर्च) कर रहे हैं, लेकिन उद्योगों तक इसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
बिड़ला के अनुसार, अगर इन दोनों के बीच एक मजबूत पुल बनाया जाए, तो इससे न केवल छात्रों को रिसर्च के बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि कंपनियों को भी नए और इनोवेटिव समाधान मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के सामने आने वाले 25 साल बेहद निर्णायक हैं और इसी समय इंडस्ट्री और शिक्षा जगत को हाथ मिलाना चाहिए।
जब उनसे उनकी कंपनी हिंडाल्को और आईआईटी (बीएचयू) के बीच किसी संभावित सहयोग के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ किया कि इस कार्यक्रम के दौरान हिंडाल्को को लेकर कोई विशेष चर्चा नहीं हुई है।
अंत में, उन्होंने युवा स्नातकों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के दौर में भारत में अवसरों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे खुद को समय के साथ बदलते रहें, नई चीजें सीखते रहें और अपनी भावनात्मक मजबूती (emotional resilience) को बढ़ाएं ताकि वे राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें।