लखनऊ में एबीवीपी की बड़ी रैली: 'अराजकता रोकें, लोकतंत्र अपनाएं' के नारे के साथ छात्रों ने भरी हुंकार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने एक विशाल छात्र रैली का आयोजन किया। "अराजकता रोकें, लोकतंत्र अपनाएं" के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत निकाली गई इस रैली में हजारों की संख्या में छात्रों और एबीवीपी सदस्यों ने हिस्सा लिया। यह मार्च लखनऊ विश्वविद्यालय से शुरू होकर हजरतगंज के गांधी चौक तक पहुंचा, जहां छात्रों ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा करने की पुरजोर मांग की।
रैली के दौरान एबीवीपी ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत में सरकारें केवल चुनावों के माध्यम से बदलनी चाहिए, न कि भीड़ के दबाव या जबरन राजनीति के जरिए। संगठन का मानना है कि यदि चुनावी प्रक्रियाओं में कोई शिकायत है, तो उसे सबूतों के साथ संवैधानिक तरीकों से उठाना चाहिए, न कि संस्थाओं के खिलाफ अविश्वास फैलाकर। इस दौरान बांग्लादेश और नेपाल के राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा गया कि भारत में ऐसी अराजकता की कोई जगह नहीं है और यहां का लोकतंत्र बेहद मजबूत है।
संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव डालना लोकतंत्र के खिलाफ: अभय प्रताप सिंह
रैली को संबोधित करते हुए एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव अभय प्रताप सिंह ने कहा कि भारत का लोकतांत्रिक ढांचा जनता के विश्वास, मतदान के अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर टिका है। उन्होंने जोर देकर कहा,
"देश में सरकार बदलने का अधिकार केवल जनता के पास है, जो अपने वोटों के जरिए यह फैसला करती है। लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद का स्वागत है, लेकिन भीड़ के दबाव या अराजकता के जरिए सरकार बदलने की कोशिशें पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।"
सिंह ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वालों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए इन संस्थाओं को दबाव में लाने की कोशिश करना लोकतांत्रिक मर्यादा के विरुद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय, उत्तराखंड, केरल और ओडिशा के छात्र संघ चुनावों में एबीवीपी की सफलता इस बात का प्रमाण है कि युवा लोकतांत्रिक प्रक्रिया और 'राष्ट्र प्रथम' की विचारधारा में विश्वास रखते हैं।
इस रैली में काशी प्रांत सचिव शिवम सिंह, गोरक्ष प्रांत सचिव मंगल गुप्ता, अवध प्रांत सचिव अर्पण कुशवाहा और कानपुर प्रांत सचिव दिनेश यादव सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। एबीवीपी ने युवाओं से अपील की कि वे लोकतांत्रिक माध्यमों से राष्ट्रीय हितों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करें।