Delhi में 225 साल में 68% सिकुड़ी यमुना, नदी का प्राकृतिक बहाव 89% तक घटा
Delhi: राजधानी दिल्ली से गुजरने वाली यमुना नदी की हालत बहुत खराब हो चुकी है। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि पिछले 225 सालों में यमुना की चौड़ाई 68% तक कम हो गई है। इतना ही नहीं, दिल्ली में नदी का प्राकृतिक बहाव भी 89%
Delhi: राजधानी दिल्ली से गुजरने वाली यमुना नदी की हालत बहुत खराब हो चुकी है। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि पिछले 225 सालों में यमुना की चौड़ाई 68% तक कम हो गई है। इतना ही नहीं, दिल्ली में नदी का प्राकृतिक बहाव भी 89% तक घट गया है, जिससे नदी अब अपनी पुरानी स्थिति के मुकाबले बहुत छोटी और कमजोर रह गई है।
यह जानकारी दिल्ली यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग और IISER भोपाल के शोधकर्ताओं ने दी है। उन्होंने साल 1799 के पुराने नक्शों, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया। रिसर्च के मुताबिक, 1799 में यमुना की औसत चौड़ाई करीब 658 मीटर थी, जो 2024 तक घटकर सिर्फ 210 मीटर रह गई। पानी के बहाव की बात करें तो यह 30,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड से गिरकर अब केवल 3,900 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड रह गया है। प्रोफेसर विमल सिंह ने बताया कि नदी की बनावट में आए इस बड़े बदलाव पर अब तक चर्चा नहीं हुई थी।
नदी की इस हालत को सुधारने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने घोषणा की है कि दिसंबर 2028 तक यमुना में एक बूंद भी बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी नहीं जाएगा। इसके लिए दिल्ली में करीब 80 ट्रीटमेंट प्लांट पर काम शुरू हो चुका है। साथ ही MCD और NDDB के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत गाय के गोबर से कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट लगाए जाएंगे ताकि कचरा नदी में न जाए और पशुपालकों की कमाई भी बढ़े।
दिल्ली सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने यमुना के कायाकल्प और नजफगढ़ ड्रेन की सफाई के लिए 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इसके तहत नजफगढ़ इलाके में 860 करोड़ की लागत से 12 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTP) लगाए जाएंगे। साथ ही, यमुना में गिरने वाले 22 बड़े नालों का ड्रोन सर्वे किया जाएगा ताकि प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाया जा सके।
हरियाणा सरकार ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। हरियाणा के मुख्य सचिव Anurag Rastogi ने निर्देश दिए हैं कि यमुना एक्शन प्लान के तहत सभी सीवेज और औद्योगिक कचरा प्रबंधन प्रोजेक्ट्स को 31 दिसंबर 2027 तक पूरा किया जाए। इसके अलावा, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) ने शास्त्री पार्क और कैलाश नगर के नालों में प्रकृति आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, जिससे गंदे पानी को प्राकृतिक तरीके से साफ किया जा सके।
नदी में साफ पानी का बहाव बनाए रखने के लिए हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तीन बड़े बांध बनाने की योजना है, जिसमें करीब 7-8 साल का समय लग सकता है। केंद्र और दिल्ली सरकार ने मिलकर 9000 करोड़ रुपये का एक जॉइंट ‘क्लीन यमुना’ प्लान भी शुरू किया है ताकि नदी को फिर से जीवित किया जा सके।