Delhi, UP: यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने की जिम्मेदारी अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास है। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में अपनी निगरानी खत्म कर दी और अब सभी राज्यों और CPCB को अपनी रिपोर्ट NGT को सौंपने का निर्द
Delhi, UP: यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने की जिम्मेदारी अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास है। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में अपनी निगरानी खत्म कर दी और अब सभी राज्यों और CPCB को अपनी रिपोर्ट NGT को सौंपने का निर्देश दिया है। दिल्ली और नोएडा के कई विभाग इस प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बताए गए हैं।
यमुना की हालत और विभागों की जिम्मेदारी क्या है?
CPCB की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली, नोएडा और यूपी की 10 एजेंसियां नदी में बढ़ते प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। संसदीय समिति की एक रिपोर्ट में तो दिल्ली से गुजरने वाले 22 किलोमीटर के हिस्से को ‘बायोलॉजिकली डेड’ यानी जैविक रूप से मृत बताया गया है। यह छोटा सा हिस्सा पूरी नदी के कुल प्रदूषण का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बढ़ाता है।
Noida Authority और दिल्ली प्रशासन क्या कदम उठा रहे हैं?
Noida Authority ने कोंडली सिंचाई नहर के जरिए यमुना में जाने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए एक प्लान बनाया है। इसके लिए CSIR-NEERI की मदद ली जा रही है और दिसंबर 2028 तक 24 नालों के ट्रीटमेंट का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, NGT ने दिल्ली प्रशासन से बिना ट्रीटमेंट के सीवेज नदी में बहाने पर सख्त जवाब मांगा है और कड़े कदम उठाने को कहा है।
आगे की कार्रवाई और कानूनी नियम क्या हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि NGT के पास पर्यावरण कानूनों को लागू करवाने की पूरी ताकत है। अब राज्यों, केंद्र सरकार और CPCB को समय-समय पर ताज़ा स्टेटस रिपोर्ट NGT को देनी होगी। कोर्ट का मानना है कि साफ पानी और स्वच्छ पर्यावरण पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, जिसे आर्टिकल 21 के तहत सुरक्षित किया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यमुना प्रदूषण की निगरानी अब कौन करेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2026 में अपनी निगरानी समाप्त कर दी है। अब यमुना सहित प्रदूषित नदियों की प्राथमिक निगरानी की जिम्मेदारी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सौंपी गई है।
Noida Authority प्रदूषण रोकने के लिए क्या कर रही है?
नोएडा अथॉरिटी ने CSIR-NEERI के साथ मिलकर कोंडली सिंचाई नहर में गिरने वाले गंदे पानी को ट्रीट करने का प्लान बनाया है, जिसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।