Delhi में यमुना के डूब क्षेत्र में कमी से बढ़ा बाढ़ का खतरा, 100 साल में एक तिहाई हिस्सा सिमटा

Delhi: दिल्ली में यमुना नदी के साथ रहने वाले लोगों के लिए एक चिंताजनक खबर आई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर विमल सिंह और उनकी टीम की एक स्टडी में सामने आया है कि पिछले 100 सालों में यमुना के डूब क्

Delhi: दिल्ली में यमुना नदी के साथ रहने वाले लोगों के लिए एक चिंताजनक खबर आई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर विमल सिंह और उनकी टीम की एक स्टडी में सामने आया है कि पिछले 100 सालों में यमुना के डूब क्षेत्र (floodplains) में करीब एक तिहाई की कमी आई है। इसका सीधा असर यह है कि अब शहर में बाढ़ का खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।

इस रिसर्च के लिए साल 1799 के पुराने नक्शों, सर्वे ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड और 2024 तक की सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया। स्टडी में बताया गया कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण की वजह से नदी का रास्ता करीब 68% तक संकरा हो गया है। 1912 के नक्शों से तुलना करने पर पता चला कि दिल्ली के लगभग 45 वर्ग किलोमीटर डूब क्षेत्र को तटबंधों (embankments) के जरिए नदी से अलग कर दिया गया। इन खाली जगहों पर खेती, बस्तियां और इंफ्रास्ट्रक्चर बना दिए गए।

नदी के अंदर रेत के जमाव (sandy channel bars) का इलाका भी बहुत कम हुआ है, जो 1985 में 20 वर्ग किलोमीटर था और 2020 तक घटकर सिर्फ 4 वर्ग किलोमीटर रह गया। इस बदलाव की वजह से नदी की प्राकृतिक क्षमता कम हो गई है और वह अब भारी बारिश के समय पानी को संभालने में सक्षम नहीं रही। इसका उदाहरण जुलाई 2023 की बाढ़ में दिखा, जब पानी का स्तर बहुत ऊपर चला गया था।

दूसरी तरफ, यूपी के गाजियाबाद में लोनी और अलीपुर तटबंध के पास प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। 13 जुलाई 2026 को यूपी सिंचाई विभाग ने बाढ़ निगरानी सेल बनाया। अधिकारियों ने बताया कि ओखला बैराज से पानी की निकासी करीब 10,000 क्यूसेक है, जबकि बाढ़ जैसी स्थिति 1 लाख क्यूसेक से ऊपर जाने पर बनती है। दिल्ली में भी 7 जुलाई 2026 को पानी का स्तर खतरे के निशान 205.33 मीटर से ऊपर था, जिसके बाद 38 जगहों पर राहत शिविर लगाए गए थे।

रिसर्च करने वाले जानकारों ने चेतावनी दी है कि नदी को और ज्यादा तटबंधों से बांधना और डूब क्षेत्रों पर कब्जा करना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि डूब क्षेत्रों को विकास के लिए इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें एक गतिशील सिस्टम के रूप में देखा जाना चाहिए।