दुनिया के सबसे महंगे रेंटल मार्केट में New York टॉप पर, Mumbai और Delhi की रैंकिंग में देखिए कहां हैं भारतीय शहर
Finance: दुनिया भर में घर किराए पर लेना अब काफी महंगा होता जा रहा है। जमीन की कमी और बढ़ती मांग की वजह से न्यूयॉर्क जैसे शहरों में किराया आसमान छू रहा है। हाल ही में Deutsche Bank Research Institute की एक रिपोर्ट सामने आ
Finance: दुनिया भर में घर किराए पर लेना अब काफी महंगा होता जा रहा है। जमीन की कमी और बढ़ती मांग की वजह से न्यूयॉर्क जैसे शहरों में किराया आसमान छू रहा है। हाल ही में Deutsche Bank Research Institute की एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें बताया गया है कि दुनिया के सबसे महंगे शहरों में भारतीय शहरों की स्थिति क्या है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के टॉप 50 सबसे महंगे रेंटल मार्केट में एक भी भारतीय शहर शामिल नहीं है। न्यूयॉर्क इस लिस्ट में पहले नंबर पर है, जहां तीन बेडरूम वाले अपार्टमेंट का किराया सबसे ज्यादा है। टॉप 10 शहरों की लिस्ट में अमेरिका और स्विट्जरलैंड का दबदबा रहा है।
| रैंक | शहर | देश |
|---|---|---|
| 1 | New York | USA |
| 2 | Zurich | Switzerland |
| 3 | San Francisco | USA |
| 4 | Boston | USA |
| 5 | Singapore | Singapore |
| 6 | Los Angeles | USA |
| 7 | Hong Kong | Hong Kong |
| 8 | London | UK |
| 9 | Sydney | Australia |
| 10 | Geneva | Switzerland |
अगर भारत की बात करें तो Mumbai दुनिया में 52वें नंबर पर है, लेकिन भारत के अंदर यह सबसे महंगा रेंटल मार्केट है। Mumbai Metropolitan Region (MMR) में इस साल किराया करीब 11% बढ़ा है। नए मेट्रो लाइन्स जैसे 2A, 7 और लाइन 6 की वजह से बाहरी इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतें 10% से 18% तक बढ़ गई हैं। यहां घरों की औसत कीमत 14,948 रुपये प्रति स्क्वायर फुट तक पहुंच गई है।
वहीं Delhi दुनिया में 68वें नंबर पर है। दिल्ली के पॉश इलाके खान मार्केट में रिटेल स्पेस का किराया साल भर में 9% बढ़ा है, लेकिन रिहायशी घरों के किराए में बढ़ोतरी 3% से कम रही है। प्रॉपर्टी खरीदने के मामले में दिल्ली दुनिया के सबसे किफायती बड़े शहरों में से एक मानी जाती है, जहां सिटी सेंटर की प्रॉपर्टी की औसत कीमत करीब 2.37 लाख रुपये प्रति स्क्वायर मीटर है।
NoBroker के को-फाउंडर सौरभ गर्ग ने बताया कि अब ज्यादा लोग घर खरीदने के बजाय लंबे समय के लिए किराए पर रहना पसंद कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण होम लोन की EMI और मासिक किराए के बीच बढ़ता अंतर है, जिससे लोगों के लिए किराए पर रहना ज्यादा आसान हो गया है।