Delhi: वर्ल्ड थैलेसीमिया दिवस 2026 के मौके पर दिल्ली-NCR के युवाओं में इस आनुवंशिक बीमारी को लेकर भारी अज्ञानता सामने आई है। यह एक ऐसी रक्त विकार बीमारी है जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता है। इस साल की थीम
Delhi: वर्ल्ड थैलेसीमिया दिवस 2026 के मौके पर दिल्ली-NCR के युवाओं में इस आनुवंशिक बीमारी को लेकर भारी अज्ञानता सामने आई है। यह एक ऐसी रक्त विकार बीमारी है जिसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता है। इस साल की थीम ‘छिपा हुआ नहीं: अनियोजित खोजना. अनदेखे का समर्थन करना’ रखी गई है, ताकि उन लोगों की पहचान हो सके जिन्हें अब तक पता ही नहीं कि वे इस बीमारी के वाहक हैं।
थैलेसीमिया क्या है और भारत में इसकी स्थिति क्या है?
थैलेसीमिया एक जेनेटिक बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में आती है। FOGSI की अध्यक्ष डॉ. सुनीता तांडुलवाडकर के मुताबिक भारत को थैलेसीमिया की दुनिया की राजधानी माना जाता है। यहाँ हर साल लगभग 10,000 से 15,000 बच्चे थैलेसीमिया मेजर के साथ पैदा होते हैं। इसे रोकने के लिए ‘प्रोजेक्ट मुक्ता’ जैसी पहल शुरू की गई है ताकि गर्भावस्था के दौरान ही इसकी स्क्रीनिंग की जा सके।
दिल्ली-NCR में बचाव के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
दिल्ली-NCR में वाहक दर अधिक होने की वजह से शादी से पहले स्क्रीनिंग कराने पर जोर दिया जा रहा है। मैक्स हॉस्पिटल, PSRI, आर्टेमिस और राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट जैसे संस्थान जागरूकता और इलाज में जुटे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्री अपूर्व चंद्र ने भी RCH कार्यक्रमों में अनिवार्य टेस्ट को जोड़ने की बात कही है ताकि समय पर पता लगाकर रोकथाम की जा सके।
वर्ल्ड थैलेसीमिया दिवस 2026 की मुख्य बातें
थैलेसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन (TIF) ने 1994 में इस दिन की शुरुआत की थी। इस साल दुनिया भर में ‘ब्रिंग थल टू लाइट’ अभियान चलाया गया, जिसके तहत कई शहरों की इमारतों को लाल रंग की रोशनी से रोशन किया गया। इसका मकसद थैलेसीमिया से जूझ रहे लोगों के प्रति एकजुटता दिखाना और स्वास्थ्य प्रणालियों द्वारा अनदेखे किए गए मरीजों को सहारा देना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
थैलेसीमिया की पहचान कैसे हो सकती है?
इसकी पहचान के लिए ब्लड स्क्रीनिंग टेस्ट किया जाता है। विशेषज्ञों ने शादी से पहले और गर्भावस्था के दौरान एंटीनेटल केयर के रूप में स्क्रीनिंग कराने की सलाह दी है।
वर्ल्ड थैलेसीमिया दिवस 2026 की थीम क्या है?
इस वर्ष की थीम ‘छिपा हुआ नहीं: अनियोजित खोजना. अनदेखे का समर्थन करना’ (Hidden No More: Finding the Undiagnosed. Supporting the Unseen) रखी गई है।