Bihar: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट की वजह से बिहार के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। इस संकट के कारण राज्य को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। मखाना और चावल जैसे मुख्य उत्पादो
Bihar: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट की वजह से बिहार के कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। इस संकट के कारण राज्य को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। मखाना और चावल जैसे मुख्य उत्पादों का निर्यात पूरी तरह रुक गया है, जिससे व्यापारियों और किसानों की चिंता बढ़ गई है।
व्यापार और निर्यात पर क्या असर पड़ा है?
बिहार का आयात-निर्यात काफी हद तक पश्चिम एशियाई देशों और वहां के समुद्री रास्तों पर निर्भर रहता है। होर्मुज़ संकट के कारण मिथिलांचल के मखाना कारोबार को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। विदेशों में भेजने के लिए तैयार मखाना अब जहाजों और विदेशी गोदामों में फंसा हुआ है। बासमती चावल और सब्जियों की मांग गिरने से कीमतों में भी भारी गिरावट आई है। बिहटा स्थित Princeton Magadh Inland Dry Port के ऑपरेशंस इंचार्ज सुधीर कुमार ने बताया कि ईरान संघर्ष की वजह से आयात-निर्यात की गतिविधियां बहुत धीमी हो गई हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में क्या स्थिति है?
9 अप्रैल 2026 तक की जानकारी के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद भी हालात सामान्य नहीं हैं। ईरान ने जहाजों के गुजरने के लिए नई और सख्त शर्तें लागू की हैं:
- पहले जहां 140 जहाज गुजर सकते थे, अब प्रतिदिन केवल 15 जहाजों को अनुमति है।
- जहाजों के लिए एक नया रास्ता तय किया गया है, जिसमें बारूदी सुरंगों का खतरा बताया जा रहा है।
- ईरान अब प्रति बैरल 1 डॉलर का टोल टैक्स वसूल रहा है, जिसका भुगतान क्रिप्टोकरेंसी में करना होगा।
- भारत के लगभग 20 जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
बिहार सरकार और केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाए?
बिहार सरकार ने 30 मार्च 2026 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई थी। इस बैठक में जरूरी सामानों की उपलब्धता और पश्चिम एशिया में काम करने वाले बिहारी प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर चर्चा की गई। दूसरी तरफ, बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर गैस सिलेंडरों की किल्लत और महंगाई के कारण वापस बिहार लौट रहे हैं। भारत सरकार का पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तेल और एलपीजी की सप्लाई सुनिश्चित करने में जुटा है और अफ्रीकी व लैटिन अमेरिकी देशों जैसे वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहा है।