Bihar: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से NH-80 पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। अब बाबूपुर गंगा घाट पर मालवाहक कार्गो जहाजों के पहुँचने से ट्रकों की आवाजाही फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है। इससे कहलगां
Bihar: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से NH-80 पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया था। अब बाबूपुर गंगा घाट पर मालवाहक कार्गो जहाजों के पहुँचने से ट्रकों की आवाजाही फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है। इससे कहलगांव से सबौर के बीच सड़क पर पसरा सन्नाटा टूटेगा और स्थानीय व्यापार को फिर से गति मिलेगी।
ट्रकों और मालवाहक वाहनों के लिए क्या है नई व्यवस्था?
भागलपुर जिला प्रशासन ने तीन निजी कंपनियों को गंगा घाटों के बीच फेरी और कार्गो सेवा चलाने की अस्थायी अनुमति दी है। कन्हैया लॉजिस्टिक्स बाबूपुर घाट से महादेवपुर गंगा घाट तक सेवा का संचालन करेगी। इन जहाजों के जरिए 18 चक्का तक के भारी वाहनों को नदी पार कराया जाएगा। कोलकाता से चार बड़े मालवाहक जहाज मंगाए गए हैं, जो 15 से 20 मिनट में 20 से 25 ट्रकों और हाईवा को पार करा सकेंगे।
पुल की मरम्मत और बेली ब्रिज का क्या है अपडेट?
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने का काम 16 मई से शुरू होगा और इसे 25 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है। तात्कालिक राहत के लिए 10 टन भार वहन करने वाला एक अस्थायी बेली ब्रिज बनाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सीमा सड़क संगठन (BRO) की है। स्थायी मरम्मत का काम बिहार राज्य पुल निर्माण निगम संभालेगा, जबकि IIT पटना की टीम सेफ्टी ऑडिट कर रही है।
आम लोगों और व्यापारियों के लिए अन्य विकल्प क्या हैं?
प्रशासन ने बरारी, बाबूपुर और कहलगांव घाटों पर फेरी सेवा के लिए किराया दर तय कर दिया है ताकि नाविकों की मनमानी न हो। जिन लोगों को नगछिया की ओर जाना है, उनके लिए सुल्तानगढ़ होते हुए मुंगेर के रास्ते को वैकल्पिक मार्ग बताया गया है। हालांकि, महादेवपुर घाट पर अभी भी भूमि अधिग्रहण की समस्या बनी हुई है, जिसे सुलझाने के प्रयास जारी हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
विक्रमशिला सेतु पर यातायात कब तक पूरी तरह बहाल होगा?
पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम 16 मई से शुरू होगा और प्रशासन ने इसे 25 दिनों के भीतर पूरा कर आवागमन शुरू करने का लक्ष्य रखा है।
भारी वाहनों के लिए अभी क्या वैकल्पिक व्यवस्था है?
बाबूपुर और महादेवपुर घाटों पर कार्गो जहाजों के जरिए 18 चक्का तक के भारी वाहनों को पार कराया जा रहा है, जिसके लिए निजी कंपनियों को अनुमति दी गई है।