World: वियतनाम के राष्ट्रपति To Lam अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत आए हैं। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरे का मुख्य मकसद भारत और वि
World: वियतनाम के राष्ट्रपति To Lam अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर भारत आए हैं। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरे का मुख्य मकसद भारत और वियतनाम के बीच व्यापार, रक्षा और नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में रिश्तों को और मजबूत करना है।
राष्ट्रपति To Lam का दिल्ली और बिहार का कार्यक्रम क्या रहा
राष्ट्रपति To Lam 5 मई 2026 को भारत पहुंचे, जहां केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने उनका स्वागत किया। दिल्ली आने से पहले उन्होंने बिहार के गया का दौरा किया, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति Lam ने गया के महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। इसके बाद 6 मई को राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पीएम मोदी के साथ उनकी मुलाकात हुई।
भारत और वियतनाम के बीच किन मुद्दों पर होगी चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति To Lam के बीच द्विपक्षीय संबंधों और दुनिया के मौजूदा हालातों पर बातचीत होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति Lam ने एनएसए अजीत डोभाल के साथ भी रणनीतिक बातचीत की। इसके अलावा वे 6 मई को सप्रु हाउस में 56वां लेक्चर भी देंगे।
इस दौरे की खास बातें क्या हैं
- यह दौरा भारत और वियतनाम के बीच ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के 10 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है।
- दौरे में वियतनाम के मंत्रियों और बिजनेस लीडर्स का एक बड़ा दल भी भारत आया है।
- मुख्य फोकस व्यापार को बढ़ाने और डिफेंस सेक्टर में सहयोग करने पर है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
वियतनाम के राष्ट्रपति To Lam ने बिहार में कहां का दौरा किया?
राष्ट्रपति To Lam ने 5 मई 2026 को बिहार के गया शहर का दौरा किया, जहां उन्होंने महाबोधि मंदिर में प्रार्थना की और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनका स्वागत किया।
भारत और वियतनाम के बीच इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस दौरे का मुख्य उद्देश्य व्यापार, रक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।