Versova-Bhayandar Coastal Road: मैंग्रोव काटने के बदले पेड़ लगाने पर विवाद, NGO ने बॉम्बे हाई कोर्ट में BMC को घेरा

Maharashtra: मुंबई के वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। एक NGO ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दावा किया है कि प्रोजेक्ट के लिए काटे गए मैंग्रोव के बदले लगाए जा रहे नए पेड़ सिर्फ दिखावा

Maharashtra: मुंबई के वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। एक NGO ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दावा किया है कि प्रोजेक्ट के लिए काटे गए मैंग्रोव के बदले लगाए जा रहे नए पेड़ सिर्फ दिखावा हैं। NGO का कहना है कि पर्यावरण को बचाने के लिए जो शर्तें रखी गई थीं, उन्हें BMC ने अब तक पूरा नहीं किया है।

पूरा मामला यह है कि इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 45,675 मैंग्रोव के पेड़ काटने की अनुमति मिली थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में BMC को यह मंजूरी दी थी, लेकिन साथ ही कुछ सख्त शर्तें भी रखी थीं। कोर्ट ने कहा था कि मैंग्रोव प्राकृतिक सुरक्षा कवच होते हैं और इन्हें केवल जनहित के बड़े काम के लिए ही हटाया जा सकता है। BMC ने कोर्ट को भरोसा दिया था कि वह काटे गए पेड़ों के मुकाबले तीन गुना ज्यादा मैंग्रोव लगाएगा और उनकी देखभाल करेगा।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, BMC को पालघर जिले में 1.37 लाख मैंग्रोव लगाने थे और अगले 10 साल तक इसकी सालाना रिपोर्ट और ऑडिट जमा करना था। इसके अलावा, BEAG की आपत्तियों के बाद पालघर में 224 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन भी मैंग्रोव के लिए दी गई थी। मैंग्रोव सेल को निर्माण के बाद बची जमीन पर 36,925 और पेड़ लगाने के निर्देश दिए गए थे।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने भी मार्च 2026 में इस मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने माना कि यह प्रोजेक्ट पश्चिमी हाईवे के जाम को कम करेगा और आम जनता के लिए फायदेमंद होगा। हालांकि, वनशक्ति जैसे संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी थी कि जिस जमीन पर नए पेड़ लगाने की बात कही जा रही है, वहां पहले से ही दूसरे प्रोजेक्ट के लिए काम चल रहा है और सैटेलाइट तस्वीरों में वहां पहले से गड्ढे दिख रहे हैं।

अब NGO ने हाई कोर्ट में यह बात दोहराई है कि केवल संख्या पूरी करना काफी नहीं है, बल्कि इलाके के पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) को वापस लाना जरूरी है। अगर BMC तय शर्तों को पूरा नहीं करता है, तो कोर्ट अवमानना (Contempt) की कार्रवाई भी कर सकता है।