Maharashtra: जैन संगठन Veerayatan की संस्थापिका पद्मश्री परम पूज्य आचार्य चंदनजी अब हमारे बीच नहीं रहीं। 22 अप्रैल 2026 को उनका निधन हो गया, जिसकी जानकारी 23 अप्रैल को सामने आई। उन्हें उनके अनुयायी प्यार से Tai Maharaj क
Maharashtra: जैन संगठन Veerayatan की संस्थापिका पद्मश्री परम पूज्य आचार्य चंदनजी अब हमारे बीच नहीं रहीं। 22 अप्रैल 2026 को उनका निधन हो गया, जिसकी जानकारी 23 अप्रैल को सामने आई। उन्हें उनके अनुयायी प्यार से Tai Maharaj कहते थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा और अध्यात्म को समर्पित कर दिया था।
कौन थीं आचार्य चंदनजी और उनका योगदान
आचार्य चंदनजी का जन्म 1937 में शकुंतला के रूप में हुआ था। वह पहली जैन साध्वी थीं जिन्हें आचार्य की उपाधि और भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। उन्होंने जैन धर्म की परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए सेवा और अध्यात्म के बीच एक मजबूत कड़ी बनाई।
क्या है Veerayatan संस्था और इसके मुख्य काम
आचार्य चंदनजी ने 1973 में Veerayatan नाम की एक गैर-लाभकारी संस्था की शुरुआत की थी। इस संस्था का मुख्य केंद्र बिहार के राजगीर में है और इसके केंद्र 10 से ज्यादा देशों में फैले हुए हैं। यह संस्था मुख्य रूप से तीन बातों पर काम करती है:
- सेवा: मानवीय मदद और समाज सेवा।
- शिक्षा: लोगों को शिक्षित करना और ज्ञान बढ़ाना।
- साधना: आध्यात्मिक विकास और मानसिक शांति।
जैन समाज पर प्रभाव
आचार्य चंदनजी ने जैन समुदाय में ‘सेवा’ के विचार को बहुत लोकप्रिय बनाया। उन्होंने सिखाया कि धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं बल्कि दूसरों की मदद करना भी है। उनके निधन से न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के उनके अनुयायियों में गहरा दुख है।