Bihar: वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट से बिहार के 9 जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और वाराणसी से कोलकाता का सफर जो पहले 12-14 घंटे लेता था, वह अब घटकर करीब 6-7 घंटे
Bihar: वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रोजेक्ट से बिहार के 9 जिलों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और वाराणसी से कोलकाता का सफर जो पहले 12-14 घंटे लेता था, वह अब घटकर करीब 6-7 घंटे रह जाएगा। 35,000 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट दक्षिण बिहार में रोजगार और व्यापार के नए मौके लाएगा।
एक्सप्रेसवे से किन जिलों को होगा फायदा और क्या है रूट
यह एक्सप्रेसवे चार राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरेगा। बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया समेत कुल 9 जिले इससे सीधे जुड़ेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि गया और औरंगाबाद जैसे इलाके अब बड़े लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित होंगे, जिससे स्थानीय लोगों को काम के नए अवसर मिलेंगे।
प्रोजेक्ट की समय सीमा और पर्यावरण मंजूरी की स्थिति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 फरवरी 2024 को इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। इसे मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हाल ही में 7 मई 2026 को झारखंड और पश्चिम बंगाल के 235 किलोमीटर लंबे हिस्से के लिए पर्यावरण मंजूरी मिल गई है। उत्तर प्रदेश में इस एक्सप्रेसवे का लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम हैं
NHAI ने पर्यावरण और जानवरों का ख्याल रखते हुए खास इंतजाम किए हैं। बाघों और हाथियों के प्राकृतिक आवास वाले क्षेत्रों में 20 हाथी-सह-वन्यजीव अंडरपास और 300 मीटर तक के पुल बनाए जाएंगे। हालांकि, पश्चिम बंगाल में करीब 50,000 पेड़ों की कटाई और 103 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग होगा, जिसे लेकर केंद्र सरकार मार्ग में बदलाव पर भी विचार कर रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से यात्रा के समय में कितनी कमी आएगी?
इस एक्सप्रेसवे के बनने से वाराणसी और कोलकाता के बीच की यात्रा का समय जो अभी 12-14 घंटे लगता है, वह घटकर लगभग 6-7 घंटे रह जाएगा।
यह प्रोजेक्ट कब तक पूरा होने की उम्मीद है?
इस परियोजना के मार्च 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि कुछ रिपोर्टों में इसे 2026-27 तक पूरा करने का जिक्र है।