US और सऊदी अरब के बीच 30 साल का परमाणु समझौता, डोनाल्ड ट्रंप ने दी मंजूरी
World : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ 30 साल के नागरिक परमाणु समझौते को मंजूरी दे दी है। इस डील के बाद अब अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब में परमाणु बुनियादी ढांचे को विकसित करने में मदद करेंगी। इस समझ
World : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ 30 साल के नागरिक परमाणु समझौते को मंजूरी दे दी है। इस डील के बाद अब अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब में परमाणु बुनियादी ढांचे को विकसित करने में मदद करेंगी। इस समझौते की औपचारिक घोषणा 22 जुलाई 2026 तक होने की उम्मीद है और इसे जल्द ही अमेरिकी कांग्रेस के पास समीक्षा के लिए भेजा जाएगा।
इस समझौते को ‘123 एग्रीमेंट’ कहा जा रहा है, जो अमेरिका के परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1954 के तहत आता है। इस डील की सबसे खास बात यह है कि इसमें सऊदी अरब को यूरेनियम समृद्ध करने की अनुमति मिल सकती है, लेकिन यह अमेरिका और सऊदी अरब के संयुक्त आकलन पर निर्भर करेगा। इस डील से अमेरिकी परमाणु उद्योग को काफी फायदा होगा और कंपनियों को अरबों डॉलर का बिजनेस मिलने की संभावना है।
हालांकि, इस समझौते को लेकर कुछ विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि बिना सख्त निगरानी के सऊदी अरब को यूरेनियम समृद्ध करने की छूट देने से मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ सकता है। इस डील में ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ और IAEA के ‘अतिरिक्त प्रोटोकॉल’ को शामिल नहीं किया गया है, जिससे वहां की परमाणु गतिविधियों की कड़ी जांच करना मुश्किल होगा।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस समझौते के जरिए अमेरिका सऊदी अरब की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर नजर रख पाएगा, ताकि वहां परमाणु हथियारों का विकास न हो। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पहले कहा था कि अगर ईरान परमाणु बम बनाता है, तो सऊदी अरब भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश करेगा। यह नया समझौता बाइडेन प्रशासन की रणनीति से अलग है क्योंकि इसमें परमाणु सहयोग को इजरायल के साथ रिश्तों को सुधारने की शर्त से अलग रखा गया है।