अमेरिका का एशियाई देशों पर दबाव, चीन से निपटने के लिए सैन्य बजट बढ़ाने को कहा

World: अमेरिका अब अपने एशियाई सहयोगियों पर सैन्य खर्च बढ़ाने का दबाव बना रहा है। पेंटागन चाहता है कि पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके। वाशिंगटन की यह

World: अमेरिका अब अपने एशियाई सहयोगियों पर सैन्य खर्च बढ़ाने का दबाव बना रहा है। पेंटागन चाहता है कि पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके। वाशिंगटन की यह रणनीति क्षेत्रीय साझेदारों के एक मजबूत नेटवर्क को तैयार करने पर टिकी है जिससे अमेरिका पर सुरक्षा का पूरा बोझ न रहे।

अमेरिकी रक्षा विभाग के अंडरसेक्रेटरी एलब्रिज कोल्बी ने 10 अगस्त 2026 को फिलीपींस की राजधानी मनीला में यह बात कही। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका एशिया से पीछे नहीं हट रहा है बल्कि वह यहाँ अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। कोल्बी ने कहा कि अमेरिका अब ‘प्रोटेक्टरेट’ के बजाय ‘पार्टनर’ चाहता है, यानी वह चाहता है कि सहयोगी देश अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाएं और अमेरिका के साथ मिलकर काम करें।

इससे पहले मई 2026 में सिंगापुर में हुए शांगरी-ला डायलॉग के दौरान रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी यही मांग की थी। उन्होंने सुझाव दिया कि सहयोगी देशों को अपनी जीडीपी का 5% हिस्सा सुरक्षा पर खर्च करना चाहिए। इसमें 3.5% मुख्य सैन्य खर्च और 1.5% सुरक्षा से जुड़ी अन्य चीजों पर खर्च होगा। जो देश इस मानक को पूरा करेंगे, उन्हें हथियारों की बिक्री में तेजी, औद्योगिक सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने जैसे फायदे मिलेंगे।

यह पूरा प्लान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘शांति के लिए शक्ति’ (peace through strength) विजन पर आधारित है। 2026 की नेशनल डिफेंस स्ट्रेटजी (NDS) में यह साफ लिखा है कि सहयोगी देशों को अपनी रक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद लेनी होगी। फिलहाल जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इस बढ़े हुए खर्च और अपने घरेलू बजट के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। जापान पहले से ही अपनी रक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव कर रहा है, जिसका अमेरिका ने स्वागत किया है।