US और Iran के बीच फिर बढ़ा तनाव, Donald Trump ने दिए हमले के आदेश, दुनिया भर में बढ़ी चिंता

World: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर सीजफायर समझौते को तोड़ने का आरोप लगाते हुए वहां सैन्य हमले किए हैं। इस घटना के बाद मध्य पूर्व के इलाके में युद

World: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर सीजफायर समझौते को तोड़ने का आरोप लगाते हुए वहां सैन्य हमले किए हैं। इस घटना के बाद मध्य पूर्व के इलाके में युद्ध का खतरा बढ़ गया है, जिसका असर वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।

मामला 17 जून 2026 को हुए एक समझौते से शुरू हुआ था, जिसमें Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 60 दिनों के लिए युद्ध रोकने और बातचीत करने पर सहमति जताई थी। लेकिन अमेरिका का कहना है कि ईरान ने इस भरोसे को तोड़ दिया। Trump ने आरोप लगाया कि ईरान ने Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों पर हमला किया, जिसके बाद US Military ने 26 जून से 28 जून के बीच ईरान के सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए।

US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि इन हमलों में ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज, रडार साइट्स और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया। Trump ने यहां तक कह दिया कि अगर ईरान ने अपनी हरकतें नहीं रोकीं, तो अमेरिका इस काम को पूरा करेगा, जिससे ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान’ का अस्तित्व ही खत्म हो सकता है। वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने चेतावनी दी कि हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा।

दूसरी तरफ, ईरान ने इन आरोपों को खारिज किया है। ईरान की संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के प्रमुख Ebrahim Azizi ने कहा कि यह सीजफायर का उल्लंघन नहीं, बल्कि उसका मैनेजमेंट है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पलटवार करते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। बहरीन ने इस हमले की कड़ी निंदा की है।

इस पूरे विवाद की मुख्य वजह व्यापारिक जहाजों पर हुए हमले बताए जा रहे हैं। 25 जून को सिंगापुर के जहाज ‘Ever Lovely’ और 28 जून को पनामा के टैंकर ‘M/T Kiku’ पर ड्रोन हमले हुए, जिसके बाद अमेरिका ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी। इस तनाव के कारण दुनिया भर के बाजारों में हलचल है क्योंकि Strait of Hormuz से तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ सकता है।