US-Iran तनाव से ग्लोबल मार्केट में हलचल, कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल से भारत में महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल
Finance: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के तेल बाजार में डर पैदा कर दिया है। Strait of Hormuz, जो दुनिया के तेल व्यापार का सबसे मुख्य रास्ता है, वहां रुकावट की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10%
Finance: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के तेल बाजार में डर पैदा कर दिया है। Strait of Hormuz, जो दुनिया के तेल व्यापार का सबसे मुख्य रास्ता है, वहां रुकावट की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10% की तेजी आई है। अगर यह स्थिति बनी रही, तो भारत जैसे देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ेगी और आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा।
मामला तब बिगड़ा जब 14 जुलाई 2026 को US Central Command ने ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री नाकेबंदी (blockade) लगाने का ऐलान किया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने खुद को ‘Guardian of the Hormuz Strait’ बताते हुए इस रास्ते से गुजरने वाले कार्गो पर 20% टोल टैक्स लगाने की बात कही है। दूसरी तरफ, ईरान ने इन दावों को खारिज कर दिया है और दावा किया है कि उन्होंने कमर्शियल जहाजों के लिए इस रास्ते को बंद कर दिया है।
इस तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों और ग्लोबल मार्केट पर पड़ा है, जिसका ब्योरा नीचे दी गई टेबल में है:
| Oil Benchmark | Price Movement / Status |
|---|---|
| Brent Crude | करीब 10.76% बढ़कर $83.31 पर पहुंचा, इंट्राडे हाई $85.64 रहा |
| WTI Crude | 9.08% बढ़कर $77.99 पर बंद हुआ, इंट्राडे हाई $80.42 रहा |
| Shipping Traffic | 10 से 12 जुलाई के बीच जहाजों की आवाजाही में 52% की गिरावट आई |
| Global Growth Forecast | IMF ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ अनुमान घटाकर 3% कर दिया है |
| OPEC Forecast | 2026 के लिए ग्लोबल डिमांड ग्रोथ अनुमान घटाकर 7.8 लाख बैरल प्रतिदिन किया |
| IEA Forecast | 2026 में डिमांड में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी की आशंका |
इस सैन्य टकराव में जान-माल का नुकसान भी हुआ है। UAE के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ओमान के समुद्री क्षेत्र में दो अमीराती टैंकरों पर ईरानी मिसाइल हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय चालक दल का सदस्य मारा गया और आठ अन्य घायल हो गए।
तेल की कीमतों में इस उछाल से जहां BP और Shell जैसी बड़ी तेल कंपनियों के शेयर बढ़े हैं, वहीं एयरलाइंस और टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई है। दक्षिण कोरिया के Kospi बाजार में 8% तक की गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सप्लाई चेन में दिक्कत आई, तो दुनिया भर में ब्याज दरों में कटौती में देरी हो सकती है।