US और Iran के बीच छिड़ी जंग से दुनिया में तनाव, 55% अमेरिकी चाहते हैं कि रुके सैन्य हमला
World : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब और गहरा गया है। एक नए सर्वे में सामने आया है कि अमेरिका के 55% लोग चाहते हैं कि उनका देश ईरान के खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल बंद करे। वहीं, करीब आधे अमेरिकियों को लगता
World : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष अब और गहरा गया है। एक नए सर्वे में सामने आया है कि अमेरिका के 55% लोग चाहते हैं कि उनका देश ईरान के खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल बंद करे। वहीं, करीब आधे अमेरिकियों को लगता है कि यह युद्ध कम से कम एक साल और चलेगा।
यह पूरा विवाद ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से शुरू हुआ था, जिसमें 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे। हालांकि जून 2026 में इस लड़ाई को रोकने के लिए एक समझौता हुआ था, लेकिन वह नाकाम रहा। इसके बाद 14 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी और ईरान के जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में नाकाबंदी लागू कर दी।
अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ईरान के कमांड सेंटर, एयर डिफेंस और मिसाइल ठिकानों पर लगातार हमले किए हैं। 16 जुलाई को भी अमेरिकी विमानों ने एक तेल टैंकर को रोक दिया जो ईरान के बंदरगाह की ओर जा रहा था। जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सहयोगियों के ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके लिए एक ‘रेड लाइन’ है और वह अमेरिकी बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है।
इस तनाव का असर भारत पर भी पड़ा है। भारत सरकार ने 16 जुलाई को अपने जहाज मालिकों को सख्त आदेश दिया है कि वे अपने नाविकों को होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जाने वाले जहाजों पर तैनात न करें, क्योंकि वहां खतरा बढ़ गया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस लड़ाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी कार्गो पर 20% फीस लगाएंगे। उन्होंने यह भी धमकी दी कि अगर ईरान ने उन्हें मारने की कोशिश की, तो वह ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे। हालांकि, अमेरिका के अंदर इस युद्ध को लेकर राय बंटी हुई है। जहां MAGA रिपब्लिकन इसका समर्थन कर रहे हैं, वहीं ज्यादातर डेमोक्रेट्स और इंडिपेंडेंट लोग इसे गलत फैसला मान रहे हैं।