Middle East में तनाव बढ़ा, अमेरिका ने ईरान पर किए हमले; दुनिया भर में बढ़ सकती है महंगाई
World: मिडिल ईस्ट यानी पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जंग अब और गंभीर हो गई है। अमेरिका ने लगातार 13वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं। इस तनाव की वजह से दुनिया भर में व्यापार और सुरक्षा को लेक
World: मिडिल ईस्ट यानी पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जंग अब और गंभीर हो गई है। अमेरिका ने लगातार 13वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं। इस तनाव की वजह से दुनिया भर में व्यापार और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर आने वाले समय में तेल की कीमतों और सामानों के दाम पर पड़ सकता है।
अमेरिकी सेना ने ईरान के कमांड सेंटर, ड्रोन स्टोरेज और संचार नेटवर्क को निशाना बनाया है। अमेरिका का कहना है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठा रहा है। जवाब में ईरान ने भी कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि वे ‘जैसे को तैसा’ वाली नीति अपनाएंगे और अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाएंगे।
इस लड़ाई में ब्रिटेन भी शामिल हो गया है। ब्रिटेन की सेना ने कहा है कि वे अपने देश की रक्षा के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम की सरकार ने अमेरिका को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की इजाजत दी है, जहाँ से B-1 बॉम्बर विमानों ने उड़ान भरी है। फिलहाल मिडिल ईस्ट में 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और जर्मनी में भी अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों को भेजा गया है।
सबसे बड़ी चिंता हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहाँ से दुनिया का काफी तेल गुजरता है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, तनाव इतना बढ़ गया है कि 23 जुलाई को यहाँ से सिर्फ एक जहाज गुजरा, जो मई के बाद सबसे कम है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सख्त लहजे में कहा है कि अगर ईरान ने जहाजों पर हमले जारी रखे, तो वे ईरान के पावर प्लांट या पुलों को तबाह कर देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की जमी हुई संपत्ति का इस्तेमाल जहाजों के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि स्थिति अब नियंत्रण से बाहर हो रही है। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने शांति की कोशिश की और एक युद्धविराम प्रस्ताव ईरान को दिया, लेकिन ईरान ने इसे ठुकरा दिया।