US ने ईरान की ओर जा रहे तेल टैंकर M/T Belma को मिसाइल से रोका, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
World: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग आइलैंड की तरफ जा रहे एक तेल टैंकर M/T Belma को बीच समुद्र में ही रोक दिया है। इस जहाज को रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने हेलफायर मिसाइल
World: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खार्ग आइलैंड की तरफ जा रहे एक तेल टैंकर M/T Belma को बीच समुद्र में ही रोक दिया है। इस जहाज को रोकने के लिए अमेरिकी सेना ने हेलफायर मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे जहाज के इंजन खराब हो गए और वह रुक गया।
यह पूरी कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाई गई नई नौसैनिक नाकाबंदी का हिस्सा है। अमेरिका ने 14 जुलाई 2026 को शाम 4 बजे से ईरान के बंदरगाहों की तरफ जाने वाले कमर्शियल जहाजों पर पाबंदी लगा दी थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, M/T Belma को कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसने बात नहीं मानी और आगे बढ़ता रहा। इसी वजह से अमेरिकी विमान ने जहाज के धुएं वाले हिस्से (smokestack) पर मिसाइल दागी ताकि जहाज डूबे नहीं लेकिन आगे भी न बढ़ सके।
M/T Belma एक क्यूराकाओ (Curacao) फ्लैग वाला जहाज है, जिसकी क्षमता 1.6 लाख टन है। अमेरिका का मानना है कि यह जहाज ईरान के गुप्त बेड़े का हिस्सा है। इस घटना के बाद मिडिल ईस्ट में माहौल काफी गरमा गया है। ईरान ने अमेरिका की इस नाकाबंदी को गैरकानूनी बताया है और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अब इस इलाके में तेल और गैस की सप्लाई सुरक्षित नहीं रहेगी।
तनाव इतना बढ़ गया है कि ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। वहीं अमेरिका ने भी ईरान के बंदर अब्बास और ग्रेटर तुम्ब आइलैंड जैसे इलाकों में कमांड सेंटर और एयर डिफेंस साइट्स को निशाना बनाया है। इस बीच, अमेरिका ने दिसंबर 2024 से ईरान में कैद एक अमेरिकी नागरिक को रिहा करवाया है, जिसे सद्भावना के तौर पर देखा जा रहा है।
इस पूरे विवाद का असर दुनिया भर के तेल बाजार पर भी पड़ रहा है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि ईरान को अब संभलकर रहना होगा। दूसरी तरफ, ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने कहा है कि अगर उन्हें अमेरिका के साथ हुए समझौते से फायदा नहीं मिला, तो वे इसे मानने के लिए मजबूर नहीं हैं।