World : अमेरिका ने मिडिल ईस्ट के महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते Strait of Hormuz में ईरानी बंदरगाहों के लिए नाकेबंदी शुरू कर दी है। यह कदम 13 अप्रैल 2026 की सुबह 10 बजे से लागू हुआ है। राष्ट्रपति Donald Trump के आदेश पर US Na
World : अमेरिका ने मिडिल ईस्ट के महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते Strait of Hormuz में ईरानी बंदरगाहों के लिए नाकेबंदी शुरू कर दी है। यह कदम 13 अप्रैल 2026 की सुबह 10 बजे से लागू हुआ है। राष्ट्रपति Donald Trump के आदेश पर US Navy उन सभी जहाजों को रोकेगी जिन्होंने ईरान को टोल दिया है। इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है।
अमेरिका की नाकेबंदी के नियम क्या हैं?
US Central Command (CENTCOM) ने साफ किया है कि यह नाकेबंदी सिर्फ ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए है। अन्य देशों के बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को कोई दिक्कत नहीं होगी। अमेरिका ने इस ऑपरेशन में 10,000 से ज्यादा सैनिकों को लगाया है। इसमें USS Tripoli जहाज पर मौजूद F-35B स्टील्थ फाइटर जेट और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि वह उन समुद्री सुरंगों (mines) को भी नष्ट करेगा जो ईरान ने रास्ते में बिछाई हैं।
ईरान और अन्य देशों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर यह नाकेबंदी जारी रही तो क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान के रक्षा प्रवक्ता Gen. Reza Talaei-Nik ने कहा कि विदेशी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ेगी। वहीं, यूरोपीय देशों ने अलग रुख अपनाया है:
- UK और Spain ने अमेरिका की इस नाकेबंदी में शामिल होने से मना कर दिया है।
- फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और ब्रिटिश PM Keir Starmer बिना किसी शर्त के रास्ता खोलने के लिए कॉन्फ्रेंस बुलाएंगे।
- यूरोप अब जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका के बिना एक अलग गठबंधन बनाने की योजना बना रहा है।
शांति की कोशिशें और मौजूदा स्थिति क्या है?
एक तरफ तनाव बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ शांति की कोशिशें भी जारी हैं। पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है। चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने भी इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभाने का वादा किया है। वहीं, इजरायल और लेबनान ने लड़ाई खत्म करने के लिए सीधी बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि अगर ईरान ने इस अहम जलमार्ग पर प्रगति नहीं की, तो बातचीत का तरीका बदलना पड़ेगा।