UP में UPTET परीक्षा: अनुभव के बाद अब योग्यता की बारी, रिटायरमेंट के करीब पहुंचे शिक्षक भी बने अभ्यर्थी

UP/Lucknow: उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 का आयोजन 2 जुलाई से 4 जुलाई तक किया जा रहा है। इस बार की परीक्षा में एक अजीब नजारा देखने को मिला, जहां सालों से बच्चों को पढ़ा रहे सरकारी शिक्षक खुद परीक्ष

UP/Lucknow: उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 का आयोजन 2 जुलाई से 4 जुलाई तक किया जा रहा है। इस बार की परीक्षा में एक अजीब नजारा देखने को मिला, जहां सालों से बच्चों को पढ़ा रहे सरकारी शिक्षक खुद परीक्षार्थी बनकर सेंटर पहुंचे। लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में अनुभवी गुरुजी अपनी योग्यता साबित करने के लिए इम्तिहान दे रहे हैं।

परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा किया गया। लखनऊ के 46 केंद्रों पर दूसरे दिन 90 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति रही। इस परीक्षा में करीब 20 लाख उम्मीदवार शामिल हो रहे हैं, जिनमें 18 लाख नए अभ्यर्थी और लगभग 2 लाख पहले से कार्यरत शिक्षक शामिल हैं। प्रशासन ने नकल रोकने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, लाइव CCTV और जैमर्स का इस्तेमाल किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए थे।

परीक्षा देने आए शिक्षकों की परेशानी भी सामने आई है। गोंडा के 55 वर्षीय शिक्षक मोहम्मद आरिफ, जिन्हें 16 साल का अनुभव है, ने बताया कि परीक्षा के सवाल उनके रोजमर्रा के शिक्षण विषयों से अलग थे, जिसके लिए अलग से तैयारी करनी पड़ी। वहीं कानपुर देहात के अरविंद बौद्ध ने अपनी बहू के साथ परीक्षा दी। उन्होंने कहा कि उनकी नौकरी में अब सिर्फ 7-8 साल बचे हैं और इस उम्र में ऐसी परीक्षा देना उन्हें सही नहीं लगा। गोरखपुर के अशोक शर्मा ने भी बताया कि उनके पास रिटायरमेंट के लिए केवल सात साल बचे हैं, फिर भी उन्हें यह परीक्षा देनी पड़ी।

शिक्षकों के अनुसार, पेपर में बाल विकास, शिक्षण पद्धति, हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, विदेश नीति, पर्यावरण और योग जैसे कई विषयों से सवाल पूछे गए। प्रशासन की बात करें तो फर्रुखाबाद में 12,624 पंजीकृत उम्मीदवारों में से 11,374 लोग परीक्षा में बैठे। वहीं बलरामपुर में 4,752 में से 4,492 अभ्यर्थी शामिल हुए। परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने लखनऊ, वाराणसी और जौनपुर से स्पेशल ट्रेनें भी चलाई थीं।