UP: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग लखनऊ पहुंचे। मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था, गोरखपुर के नेतृत्व में थारू समाज और अन्य जनजातीय समुदायों ने गोंड (Gond) जाति के प्रमाण पत
UP: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग लखनऊ पहुंचे। मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था, गोरखपुर के नेतृत्व में थारू समाज और अन्य जनजातीय समुदायों ने गोंड (Gond) जाति के प्रमाण पत्रों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी लखनऊ के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
गोंड जाति प्रमाण पत्रों को लेकर क्या है मुख्य विवाद
आदिवासी समाज का आरोप है कि कहार, गोड़िया, भुज, भड़भूजा और धुरिया समुदाय के कुछ लोग अपने नाम के साथ गोंड शब्द जोड़कर अनुसूचित जनजाति (ST) के फर्जी प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। इस वजह से असली आदिवासी समाज के लोगों के अधिकार छिन रहे हैं। लोगों का कहना है कि गलत तरीके से बनवाए गए इन सर्टिफिकेट्स के जरिए सरकारी नौकरियों और योजनाओं का लाभ उठाया जा रहा है, जिससे वास्तविक हकदार पिछड़ रहे हैं।
किन जिलों में सामने आए फर्जीवाड़े के मामले
ज्ञापन में बताया गया है कि यह समस्या प्रदेश के कई जिलों में फैली हुई है। मुख्य रूप से गोरखपुर, कुशीनगर, वाराणसी, मऊ, देवरिया, बलिया, गाजीपुर, महाराजगंज, संतकबीरनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और आजमगढ़ जैसे जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं। इसके अलावा सोनभद्र, मिर्जापुर, हमीरपुर, बांदा, ललितपुर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर खीरी के जनजातीय समुदायों ने भी अपने अधिकारों पर संकट जताया है।
प्रशासन से क्या की गई मांगें
9 मई 2026 को लखनऊ में आयोजित इस शांति मार्च के दौरान संगठन ने मांग की कि फर्जी प्रमाण पत्रों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की जाए। समिति ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इन फर्जी सर्टिफिकेट्स पर रोक नहीं लगी, तो असली अनुसूचित जनजातियों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस आयुक्त लखनऊ से अनुमति लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
आदिवासी समाज ने लखनऊ में प्रदर्शन क्यों किया?
आदिवासी समाज ने गोंड जाति के फर्जी प्रमाण पत्रों की उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया, ताकि सरकारी योजनाओं और नौकरियों का लाभ केवल वास्तविक अनुसूचित जनजातियों को ही मिल सके।
किन समुदायों पर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप है?
आरोप है कि कहार, गोड़िया, भुज, भड़भूजा और धुरिया समुदाय के कुछ लोग अपने नाम के साथ ‘गोंड’ शब्द जोड़कर एसटी (ST) सर्टिफिकेट बनवा रहे हैं।