UP में बसों की होगी कड़ी जांच, फायर सेफ्टी उपकरण नहीं मिले तो नहीं मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट
UP: लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बसों में सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब प्रदेश की सभी बसों की गहन जांच होगी ताकि यात्रियों को सुरक्षित सफर मिल सके। परिवहन विभाग ने इसके ल
UP: लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बसों में सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अब प्रदेश की सभी बसों की गहन जांच होगी ताकि यात्रियों को सुरक्षित सफर मिल सके। परिवहन विभाग ने इसके लिए 25 जून से 23 जुलाई 2026 तक एक विशेष 30 दिवसीय अभियान चलाने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले को राज्य के लिए एक बड़ा सबक बताया है और राज्यव्यापी जांच के आदेश दिए हैं। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन और परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बसों में अग्निशमन यंत्रों (Fire Extinguishers) की उपलब्धता और उनकी कार्यशीलता को सुनिश्चित किया जाए। अब अग्नि सुरक्षा उपकरणों को वाहन फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए एक अनिवार्य शर्त बना दिया गया है।
इस अभियान के तहत स्लीपर बसों, स्कूल बसों, स्टेज कैरिज और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों की जांच की जाएगी। प्रवर्तन अधिकारी बस अड्डों, टोल प्लाजा, प्रमुख रास्तों और जनपद की सीमाओं पर गाड़ियों को रोककर उनकी चेकिंग करेंगे। विशेष रूप से स्कूल बसों में फायर सेफ्टी के साथ-साथ अन्य सुरक्षा मानकों की भी जांच होगी।
| जांच के मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अभियान की अवधि | 25 जून से 23 जुलाई 2026 तक |
| अनिवार्य उपकरण | ड्राई पाउडर टाइप अग्निशमन यंत्र (इंजन कक्ष के पास) |
| चेकिंग का आधार | उपकरण की क्षमता, वैधता, रिफिलिंग और सही स्थान पर स्थापना |
| सख्त कार्रवाई | उपकरण न होने या खराब होने पर फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा |
| नियम का हवाला | केंद्रीय मोटरयान नियमावली 1989 का नियम-128 |
| जांच स्थल | बस अड्डे, टोल प्लाजा और जिला सीमाएं |
परिवहन विभाग ने सभी RTO और ARTO को निर्देश दिया है कि वे इस अभियान की पूरी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजें। वाहन मालिकों और स्कूल प्रबंधन को चेतावनी दी गई है कि वे समय रहते अपने वाहनों की सर्विसिंग और रिफिलिंग करा लें, अन्यथा उन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने में दिक्कत होगी।