UP में CJP के प्रदर्शन में जाने से रोके गए छात्र, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर पुलिस ने की कार्रवाई

UP: उत्तर प्रदेश में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर लखनऊ में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कई छात्रों को पुलिस ने कथित तौर पर रास्ते में ही रोक लिया। छात्रों का आरोप है कि उन्हें रेलवे स्टेशन,

UP: उत्तर प्रदेश में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर लखनऊ में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कई छात्रों को पुलिस ने कथित तौर पर रास्ते में ही रोक लिया। छात्रों का आरोप है कि उन्हें रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और यहाँ तक कि उनके घरों में नजरबंद करके लखनऊ पहुँचने से रोका गया, जिससे शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह पूरा मामला 12 जून 2026 को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित प्रदर्शन से जुड़ा है। इस प्रदर्शन का नेतृत्व अभिजीत दीपके कर रहे थे और इसकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे शहरों से लखनऊ जा रहे छात्रों को पुलिस और स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) ने निशाने पर लिया। प्रेमचंद चौधरी नाम के एक छात्र ने बताया कि उन्हें प्रयाग स्टेशन पर रोका गया और बाद में रायबरेली में ट्रेन से उतार दिया गया। वहीं चंद्र प्रकाश जैसे अन्य छात्रों को पुलिस और LIU की तरफ से फोन कॉल आए और उन्हें लखनऊ न जाने की हिदायत दी गई।

छात्रों के साथ-साथ इस आंदोलन का समर्थन करने वाले कुछ शिक्षकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। विवेक सर और रवि सर सहित कुछ शिक्षकों को टुंडला जंक्शन पर हिरासत में ले लिया गया। गौरतलब है कि शिक्षक विवेक कुमार ने इस प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन भी किया था, जिसके बाद लखनऊ प्रशासन ने 12 जून को इको गार्डन में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक प्रदर्शन की इजाजत दी थी। हालांकि, मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और CJP अध्यक्ष अभिजीत दीपके को वहां भाषण देने से कथित तौर पर रोक दिया गया।

इस पूरे मामले पर लखनऊ के संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने कहा कि अनुमति न मिलने की शुरुआती खबरें गलत थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 11 जून की देर रात तक कोई आवेदन नहीं मिला था, लेकिन बाद में एक व्यक्ति को अनुमति दे दी गई थी। दूसरी तरफ, छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे यात्रा का कारण पूछा और उन्हें विरोध प्रदर्शन छोड़कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी पार्टी शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल कर रही थी।